जिन कंपनियों ने अपने कार्यक्रम रद्द किए उनकी सभी सीटें सौ के करीब बैठती हैं। कहा जा रहा है कि अगर ये प्लेसमेंट कैंप होते तो 100 छात्रों को नौकरी मिलती। एएमयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष सैयद माजिन जैदी कहते हैं कि इस स्थिति की पूरी जिम्मेदारी एएमयू प्रशासन की है। जबरदस्ती यूनिवर्सिटी बंद करने की वजह से न सिर्फ शैक्षिक गतिविधियां चरमरा गईं, बल्कि छात्रों को मिलने वाली नौकरियां भी हाथ से निकल गईं।
कॉरपोरेट मीट पर भी आशंका के बादल
आठ फरवरी को कैंपस में एक कारपोरेट मीट होनी है। इसमें देश विदेश की दिग्गज कंपनियों और कारपोरेट जगत के बड़े नाम शामिल होंगे। इस कारपोरेट मीट के माध्यम से छात्रों को भी कॉरपोरेट जगत की जरूरतें जानने का मौका मिलेगा, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए होने वाली इस मीट पर भी आशंका के बादल मंडरा रहे हैं।