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बिरला, महिंद्रा, डीएलएफ, जियो सरीखी नामी कंपनियों के नाम पर करोड़ों रुपये ठगने का आरोप, गिरफ्तार

Thu, 18 Jul 2019 01:22 AM IST
Abhishek Singh अभिषेक शर्मा, अलीगढ़
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जालसाज गिरफ्तार - फोटो : Amar Ujala
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फाइनेंस सेक्टर की निजी कंपनियों के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले रैकेट ने देश की नामी-गिरामी कंपनियों को भी नहीं छोड़ा। बिरला, महिंद्रा, डीएलएफ, जियो और पतांजलि सरीखी कंपनियों के नाम पर गूगल पर फर्जी वेब-पेज बनाकर यह रैकेट लोगों को फंसा रहा था। ठगी गई रकम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले कुछ सप्ताह में इस रैकेट के मात्र दो बैंक खातों में 55 लाख रुपये आए हैं और छोटी-छोटी किश्त में आई यह रकम तत्काल निकाल ली गई।

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यह रैकेट अलीगढ़ से करीब आठ माह से सक्रिय है। एक अनुमान है कि 2 हजार से अधिक लोगों से यह रैकेट अब तक 4 करोड़ के आसपास रकम ठग चुका होगा। हालांकि इसकी सच्चाई एसआईटी जांच पूरी होने पर ही उजागर होगी। मगर इस रैकेट की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जब बैंक खातों का इस्टेटमेंट निकलवाया तो पता चला कि 2 खाते किसी प्रांत में फ्रीज कर दिए गए हैं। उनका इस्टेटमेंट एफआईआर देने पर ही मिल सकेगा। 

ठगी के तरीके में गूगल से लेकर व्हाट्सएप तक का प्रयोग

इस रैकेट ने 49 कंपनियों के वेब-पेज तैयार कराकर उन्हें गूगल डोमिन पर अपलोड कर रखा था, जिन पर अपने मोबाइल नंबर अंकित कर रखे थे। गूगल की बूस्टर सेवा के जरिए देश के विभिन्न प्रांतों में उसे प्रचारित कराया जा रहा था। जब लोग गूगल पर ऋण संबंधी जानकारी के लिए खोज करते तो इनके फर्जी वेब-पेज से सामना होता। इनके नंबरों पर लोग संपर्क करते। फिर यह लोग व्हाट्सएप के जरिये ग्राहक को खुद से जोड़ते और उसे अपने ऑफर बताते।
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जब वह ऋण लेने को तैयार होता तो उससे 5 हजार रुपये प्रोसेसिंग फीस के रूप में अपने किसी एकाउंट में डलवाते। फिर कुछ दिन के इंतजार के बाद उसे अपने पास मौजूद प्रिंटर की मदद से पहले से तैयार फर्जी नोटरी शपथ पत्र पर ऋण मंजूर होने की सूचना, शर्त, प्रक्रिया आदि ई-मेल पर भेजते। इसके बाद उससे ऋण की रकम के अनुसार 10 से लेकर 25 से 30 हजार रुपये तक ऋण मंजूर होने पर अपने खाते में डलवाते। इसके बाद ग्राहक से यह लोग संपर्क तोड़ना शुरू कर देते थे।

अगर किसी तरह से ग्राहक का इनसे संपर्क बना भी रहता तो बताते थे कि किसी तकनीकी कमी के कारण आपका ऋण अटक रहा है। अगर आप चाहें तो आपके द्वारा दी गई रकम वापस हो सकती है, मगर आपको अब तक हुई प्रक्रिया के नाम पर 10 हजार रुपये और देने होंगे। ग्राहक यह रकम भी दे देता। फिर वह व्यक्ति कभी इनसे संपर्क नहीं कर पाता था।

असली बैंक खातों के जरिये ठगी कर रहा था रैकेट

यह रैकेट जिन बैंक खातों का प्रयोग रकम लेने में और उस रकम को एटीएम की मदद से निकालने में कर रहा था। वह बैंक खाते इन्होंने अपने कुछ अनपढ़ परिचितों के प्रमाण पत्रों पर खुलवाए थे। जब किसी प्रांत में इनकी ठगी की शिकायत पुलिस तक पहुंचती और पुलिस संज्ञान लेती तो ज्यादा से ज्यादा पुलिस बैंक खाता फ्रीज करा दे रही थी। बाकी इन तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था। 


छत्तीसगढ़ की तरह ढकपुरा बन रहा था बेस, कई राज्यों में फैले माड्यूल्स

खास बात ये है कि इनका सरगना विकास ढकपुरा अरनिया खुर्जा का है। विकास के गांव के अनगिनत लोग इस धंधे में संलिप्त हैं। अब तक पूरे देश की पुलिस छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके से संचालित ठगी रैकेट से परेशान थी। देश भर में इनाम, लाटरी, ऋण आदि के नाम पर ठगी वहीं से होती आ रही है। वहां पुलिस की जाने की हिम्मत नहीं हो पाती। मगर बुलंदशहर के अरनिया क्षेत्र का गांव ढकपुरा देश में इस ठगी का दूसरा बेस बनता जा रहा है।

आलम यह है कि ढकपुरा व उसके आसपास के चार पांच गांव में अधिकांश युवा इसी धंधे में शामिल हैं। लोग धंधा सीखते जाते हैं और सुदूर प्रांतों के बड़े-बड़े शहरों में फैलकर इसी माड्यूल पर धंधा शुरू कर देते हैं। विकास से पूछताछ में उसके यहां से काम सीखकर निकले माड्यूल गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, दिल्ली, मथुरा, नोएडा, जयपुर, भोपाल, पानीपत, सोनीपत, चंडीगढ़ आदि राज्यों में धंधा कर रहे हैं। 

रैकेट द्वारा फर्जी तरीके से संचालित 49 फाइनेंस कंपनियां

1-जीवन ज्योति फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 2-बालाजी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 3-ऑल इंडिया ग्रुप फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 4-भाग्य लक्ष्मी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 5-बिरला फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 6-ओसीबी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 7- धनलक्ष्मी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 8- कात्या ग्रुप फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 9- डीएलएफ  ग्रुप फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 10- इक्यूवीटस फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 11-गणेश फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 12-गंगा यमुना फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 13- गणपति फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 14-गीताजंली फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 15- हिंदुजा फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 16-जनलक्ष्मी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 17-जीविका फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 18-जियो ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड, 19-जियो ग्रुप फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 20- खन्ना फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 21-महेंद्रा फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 22-मण्णपुरम फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 23- एमआई फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 24-माइक्रां फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 25- मस्कट फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 26- नवयुग फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 27-राधे फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 28-जी राधे ग्रुप फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 29-रेपको फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 30-समृद्धि फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 31-सुंदरम फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 32-उषा फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 33-उत्तम फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 34- भावना फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 35-भवानी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 36- पतांजली फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 37- मंगलम फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 38-शिव वाटिका फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 39- शुभारंभ फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 40- तिरुपति फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 41- कान्हा फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 42-अलमदीना फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 43-भावना फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 44-गैलेक्सी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 45-जेपी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 46-मोरा ग्रुप  फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 47- नव्या फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 48- धानी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, 49- लीला फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड
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रैकेट ने इन बैंक खातों में मंगाई गई रकम

1-खाता सं. 6685057294 इंडियन बैक अलीगढ़।
2-खाता सं. 06672413000212 ओरियंटल बैंक आफ  कामर्स अलीगढ़।
3-खाता सं. 0704104000089663 आईडीबीआई बैंक अलीगढ़।
4-खाता सं. 0556053000006209 साउथ इंडियन बैंक इंदिरापुरम गाजियाबाद।
5-खाता सं. 60319548926 बैंक आफ  महाराष्ट्र अलीगढ़।
6-खाता सं. 4942101005425 केनरा बैंक अलीगढ़।
7-खाता सं. 48888100000953  बैक आफ  बड़ौदा खोड़ा गाजियाबाद।
8-खाता सं. 3713145016 सेंट्रल बैंक आफ  इंडिया अलीगढ़।
9-खाता सं. 717801011004213 विजया बैंक खोड़ा गाजियाबाद।
10-खाता सं. 0511000100349590 पीएनबी अलीगढ़।
11-खाता सं. 3947000100138475 पीएनबी बैंक कवि नगर गाजियाबाद।
12-खाता सं. 50100258285739 एचडीएफसी बैंक गाजियाबाद।
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