4-डी कुपोषित बच्चों को अब जिला अस्पताल से मायूस नहीं लौटना पड़ेगा। बस उनके पास राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का स्क्रीन कार्ड होना चाहिए। सभी जिला अस्पतालों में इन बच्चों को प्राथमिकता से उपचार मिलेगा। साफ-साफ कहा है कि सभी चिकित्सालयों पर एक नोडल अफसर कुपोषण मामलों के लिए नियुक्त किया जाएगा। ‘अमर उजाला’ के लंबे अभियान के बाद प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने सभी चिकित्सा प्रमुखों को ये निर्देश जारी किए हैं। बता दें कि इससे पहले सीएचसी स्तर तक पर दस-दस बेड रिजर्व रखने के निर्देश दिए जा चुके हैं। यह अमर उजाला के अभियान के क्रम में स्मार्ट विलेज द्वारा भेजे गए सुझावों को ध्यान में रखकर हो रहा है।
अमर उजाला कुपोषण के खिलाफ 10 जनवरी से लगातार अभियान छेड़े हुए है। इससे पहले लोग खान पान की कमी को ही कुपोषण का कारण मानते थे। कुपोषण की 4-डी अवस्था को जानते ही नहीं थे। 4-डी यानी चार डिफेक्ट क्रमश: जन्मदोष, कमी, बीमारी और विकासात्मक विलंब। इन चार डिफेक्ट्स से 30 प्रकार की बीमारियां बच्चे को घेर लेती हैं, जिससे बच्चा कुपोषण की गंभीर अवस्था में पहुंच जाता है। अभियान के दौरान अमर उजाला ने 24 जनवरी के अंक में ‘लापरवाही: गलत इलाज से कुपोषित नकुल मौत की कगार पर’ शीर्षक से जिला अस्पतालों की पोल खोली थी। ऐसे तमाम खुलासा खबरों के साथ सहयोगी संस्था स्मार्ट विलेज फाउंडेशन के जरिये सीएम व पीएम तक 8 बिंदु सुझाव भी भिजवाये थे। बिंदु 6 में जिला अस्पतालों में सुधार का सुझाव भी दिया था।
बोले प्रमुख सचिव
संज्ञान में आया है कि जिला चिकित्सालयों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत चिह्नित स्वास्थ्य अवस्थाओं से ग्रस्त बच्चों के निशुल्क उपचार के लिए समुचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आपको निर्देशित किया जाता है कि कार्यमक्रम के अंतर्गत चिह्नित स्वास्थ्य अवस्थाओं से ग्रसित बच्चों जिनके पास आरबीएसके से स्क्रीनिंग कम रेफरल कार्ड है, उन बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर निशुल्क उपचार कराया जाना सुनिश्चित करें।
10-10 बेड सीएचसी पर भी रिजर्व
इससे पूर्व सीएचसी स्तर पर कुपोषित बच्चों के लिए 10-10 बेड रिजर्व करने का निर्देश भी शासन से दिए जा चुके हैं। पूरे सिस्टम को अपडेट कर इस बाबत दायरा बढ़ाने का सुझाव भी अमर उजाला अभियान के तहत बिंदु 7 में दिया गया था।
प्रमुख सचिव साहब के निर्देशों के अनुपालनार्थ कार्यवाही की जा रही है। सभी चिकित्सालयों में इसके लिए नोडल अफसर भी नियुक्त कराए जा रहे हैं।
-डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमओ