दूर-दूर से कांवड़ लेकर जा रहे कांवड़ियों के पैरों में चलते-चलते छाले पड़ गए है। लेकिन, भोले की भक्ति में लीन भक्तों के पैर नहीं रुके। आधी रात को शिवालयों में पहुंचकर जलाभिषेक करने के बाद ही भक्त माने। राजेश ने कहा कि पहली बार बाबा को जलाभिषेक कर बहुत ही प्रसन्नता हो रही है। सावित्री देवी ने कहा कि पैरों में छाले हो गए थे। फिर भी उत्साह कम नहीं हुआ। पुलकित ने कहा कि पांच साल से कांवड़ ला रहा हूं। कोई परेशानी नहीं होती। पल्लवी ने कहा कि पैर में चोट लगी थी। शिविर में पट्टी कराई। शिविर संचालक डॉ. भरत वार्ष्णेय ने कहा कि कांवडि़यों के पैरों में लगे घाव पर स्प्रे व मशीन से दर्द में राहत दिलाई।
रामघाट रोड पर भक्ति का सैलाब, भोले के भजनों पर झूमें कांवडिए
महाशिवरात्रि पर्व को लेकर 25 फरवरी को रामघाट रोड पर भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा है। शिव भक्तों में अथाह आस्था दिखाई दे रही है। कांवड़ियों का सैलाब शिव मंदिरों की ओर चल पड़ा है। बम-बम भोले, हर हर भोले के जयकारे के साथ रामघाट रोड गूंज रहा है।
कांवडियों के हाथ में कलश है, तो किसी ने भोले की भव्य झांकी सजा रखी है। कांवड़ का श्रृंगार देखते ही बन रहा था। रुमाल, गुब्बारे, भगवा धागे, भगवा वस्त्र समेत श्रृंगार की तमाम वस्तुएं कांवड़ में लगा रखीं हैं। शिव भक्ति में डूबे कांवड़ियों में आनंद देखते ही बनता है। झूमते-नाचते सभी चल रहे हैं। आनंद में लंबी यात्रा और रास्ते में पड़े ईंट-पत्थर कुछ भी असर नहीं कर रहा है। बस इन्हें तो भगवान शिव की भक्ति करनी है। इसलिए रामघाट रोड पर कांवड़ियों की अनवरत-अन्नत श्रृंखला देर रात तक चलती रही। भक्ति का ऐसा स्वरूप है कि रास्ते में चलने वाले राहगीर भी जय भोले किये बिना नहीं रहते हैं। जगह-जगह शिविर लगाकर लोग भक्तों की सेवा में जुटे रहे। कांवड़ उठाने में जवान और बुजुर्ग हैं तो बच्चे भी पीछे नहीं हैं।