मशहूर शास्त्रीय नृत्यांगना मेघ रंजनी।
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मां ही मेरी गुरु हैं और बचपन से ही उनका नृत्य देखकर रोमांच का अनुभव होता था। उन्हें देखकर ही मेरे मन मस्तिष्क में नृत्यांगना बनने का शौक जागा। उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया। नृत्य शिक्षा दी और उन्हीं की प्रेरणा से मैं क्लासिकल, कत्थक एवं सथ्रिया नृत्य में ऊंचाईयां हासिल कर सकी हूं। अलीगढ़ के बारे में एएमयू के कारण जानकारी थी। नुमाइश के बारे में अब आकर पता चला है।
यह विचार नुमाइश गेस्ट हाउस में प्रेस से रूबरू होते हुए गीत संगीत के सुप्रसिद्घ सिंगारमणि अवार्ड से सम्मानित नृत्यांगना मेघ रंजनी ने व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि अब तक वह देशभर में कार्यक्रमों के अलावा लंदन, इजिप्ट, इजराइल, यूएसए, कनाडा में कार्यक्रम कर चुकी हैं।
हाल ही में उन्होंने तथा मां प्रख्यात नृत्यांगना मरामी और अपने ग्रुप के साथ न्यूजीलैंड के वेलिंगटन एवं आकलैंड शहर में हुए एशिया दिवाली फेस्टिवल में हिस्सा लिया था। ग्रुप की सदस्य एवं असमिया फिल्म प्रियार प्रियोर में अभिनय कर चुकी दीप ज्योति ने बताया कि उद्घाटन कार्यक्रम में सथ्रिया नृत्य आकर्षण का केंद्र रहेगा। मरामी ने कहा कि उनके गुरु सुरेंद्र सेखिया थे। इस मौके पर ग्रुप के सदस्य दीपांकर, देवा रति, सुनीता आदि उपस्थित थे।