गांव लधौआ स्थित चीनी मिल परिसर में चल रही श्रीराम कथा एवं 108 कुंडीय महायज्ञ के छठवें दिन कथा व्यास जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने भगवान श्रीराम की वन गमन लीला का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि वनवास केवल राजमहल का त्याग करना नहीं था, बल्कि धर्म, मर्यादा, सेवा और लोक कल्याण की स्थापना करने का महान संकल्प था।
जगद्गुरु महाराज ने लक्ष्मण के अतुलनीय सेवा भाव का वर्णन करते हुए कहा कि 14 वर्षों के वनवास में लक्ष्मण ने स्वयं को पूरी तरह प्रभु श्रीराम और माता सीता की सेवा में समर्पित कर दिया था। जब भी प्रभु श्रीराम को पादुका की आवश्यकता होती, तो वह स्वयं ही पादुका बन जाते थे। शयन, आसन, तकिया अथवा अन्य किसी सुविधा की आवश्यकता होने पर भी वे स्वयं को ही प्रभु की सेवा में अर्पित कर देते थे। उनका जीवन निस्वार्थ सेवा, त्याग और समर्पण का अनुपम उदाहरण है।
रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि चित्रकूट ही भगवान श्रीराम का वास्तविक निवास है। भगवान श्रीराम और माता सीता दोनों ही चित्रकूट को अपना सच्चा घर मानते थे। भगवान श्रीराम चित्रकूट को कभी नहीं छोड़ते, क्योंकि यह भूमि उनके तप, त्याग, प्रेम और भक्ति की साक्षी है। उन्होंने कहा कि चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम की दिव्य लीलाओं का केंद्र है।
कथा के दौरान आयोजक ठा.देवेंद्र सिंह, नीतू सिंह, पंकज मिश्र, युवराज अंबरीश पाल सिंह, शीलू ठाकुर, रिंकी जादौन, प्रताप ठाकुर, टैनी ठाकुर, रिषीपाल सिंह, नीरज शर्मा, रौकी जादौन, गोलू ठाकुर, संजीव सिंह, सुनील सिंह, अवधेश शर्मा, मोनू सिंह, रितिक शर्मा, मोहित उपाध्याय, कोमल लवकुश पुंढीर, आशू पंडित, धर्मेंद्र सिंह, सत्येन्द्र पाल सिंह, महेश शर्मा, जय प्रकाश शर्मा, लालता प्रसाद शर्मा, अभय प्रताप सिंह व अमित उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
फोटो नं 10 लधौआ में राम कथा के पश्चात आरती करते आयोजक ठा. देवेंद्र सिंह, नीतू सिंह व पंकज मिश्र
फोटो नं 11 कथा के दौरान पंडाल में मौजूद श्रोताओं की भारी भीड़
फोटो नं 13 कथा का मंचन करते जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज