अलीगढ़ जिले के 32,671 लाभार्थियों में से 25,298 ऐसे हैं जिन्होंने ईमानदारी से अपना लिया गया ऋण चुकाया है और बढ़ी हुई राशि के लिए सफलतापूर्वक आवेदन भी किया है। यह दिखाता है कि योजना का लाभ बड़ी संख्या में सही लोगों तक भी पहुंचा है।
कोविड के बाद फिर नौकरी करने फरीदाबाद पहुंचा
केस-1- कोविड काल में सुरेश की प्लाइवुड बनाने वाली कंपनी में नौकरी चली गई थी। वह गुरुग्राम से अलीगढ़ आ गया था। कॉस्मेटिक सामान बेचने का काम शुरू करने के लिए उसने पैसा लिया था। अब बताया गया है कि वह फरीदाबाद में किसी कंपनी में काम कर रहा है। पैसा बैंक को नहीं मिला है।
कचौड़ी की जगह कारपेंटर का काम करने पहुंचा दिल्ली
केस- 2- कचौड़ी की ढकेल लगाने के लिए लक्ष्मण ने स्वनिधि योजना के तहत पैसा लिया था। जब एक साल तक दिए गए ऋण की कोई किस्त नहीं आई तो बैंक ने उल्लेख किए गए पते पर संपर्क किया। पता चला कि वह एनसीआर में कारपेंटर का काम कर रहा है। पैसा बैंक को नहीं मिला है।