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पड़ताल: ...तो क्या जुगल जोड़ी ने पंचायत चुनाव में बची शराब ठेकों पर खपाई

Sat, 29 May 2021 02:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक शर्मा, अलीगढ़

सार

  • एक मुख्य शराब तस्कर ने पत्नी को लड़ाया था जिला पंचायत का चुनाव
  • दूसरा प्रमुख के लिहाज से लड़ा था बीडीसी का चुनाव, दोनों ही जीते
  • दोनों ही जिले में शराब तस्करी के मामले में कई साल से कुख्यात
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हादसे के बाद सन्नाटा... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोंडा के गांव धारा की गढ़ी के सगे भाई अनिल-सुधीर और जवां के सगे भाई ऋषि-मुनीष शराब कारोबार में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। यह पहला मौका नहीं है, वैध शराब ठेकों की आड़ में अवैध कारोबार के आरोप इन पर समय-समय पर लगते रहे हैं।

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कई बार मुकदमे भी दर्ज हुए। मगर राजनीतिक रसूख, सिस्टम में मिलीभगत के दम पर हर बार ये बचते रहे हैं। इस घटना के बाद जब इन दोनों के नाम सामने आए तो हर जानकार के मुंह से बस एक ही बात निकली कि दोनों ने पंचायत चुनाव लड़ा है। उसमें बांटने के लिए जो मिलावटी शराब मंगाई गई होगी, उसी शराब को अब बचने पर ठेकों पर बिकवाया जा रहा होगा। 

बाहर मिले संदिग्ध खाली पऊआ, अंदर से गायब था गलत माल
इस बात की तस्दीक करसुआ के ठेके पास मिले चार पऊओं ने कर दी है। डीएम एसएसपी ने वहां पहुंचकर पुलिस से आसपास खेतों में जांच कराई तो यह चार पऊआ मिले। उन पऊओं पर लगे होलमार्क की जांच की गई। मगर, इस शराब की कोई रिकार्ड ही नहीं मिला है।
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हॉलमार्क का मिलान शराब गोदाम से उठान किए गए माल के रिकार्ड से नहीं मिल पाया है। इससे साफ है कि बाहर की शराब ठेके से बेची जा रही थी। तलाशी के दौरान ठेकों में कोई गलत माल न मिलने से यह अनुमान है कि रात में ठेका बंद करते समय गलत माल वहां से कहीं शिफ्ट किया गया होगा। डीएम उनमें बची कुछ बूंद शराब के सैंपल भी भरवाए हैं, जिससे की इस शराब में क्या मिला था, इसका पता लग सके। 

जिले में ही मिलावट कराने का अंदेशा
इस जांच के बाद यह माना जा रहा है कि यह शराब जिले में ही अवैध शराब फैक्टरी में तैयार कराई जा रही है। जहां पर नकली शराब बनाकर पऊओं में भरकर पैकिंग के बाद बेची जा रही है। अधिकारी इस बात का भी अंदेशा जता रहे हैं कि खैर की हरियाणा की सीमा से भी यह माल बनवाकर लाया जा सकता है। कुल मिलाकर माल कहां तैयार हुआ, यह जांच व आरोपियों से पूछताछ के बाद ही साफ होगा।

ये है दोनों जोड़ियों का इतिहास...

ऐसे बचती रही अनिल-सुधीर जोड़ी:- धारा की गढ़ी के रहने वाले ये दोनों भाई करीब एक दशक से इस कारोबार में पांव जमाए हैं। वाकया 2008 का है, जब तत्कालीन एसएसपी असीम अरुण ने इगलास क्षेत्र के बेसवां में इनके ठिकाने पर नकली देशी शराब बनते पकड़वाई थी। भारी मात्रा में माल, पैकिंग उपकरण आदि पकड़े गए थे। इन्हें जिले का बड़ा शराब तस्कर माना गया। चूंकि इनके आठ-दस ठेके भी थे।

माना गया कि ये इन्हीं ठेकों पर नकली माल बेचते हैं। मुकदमा दर्ज हुआ। चार्जशीट भी लगी। मगर एसएसपी के तबादले और नए एसएसपी के आने के बाद इन्होंने उस मुकदमे में खुद को पुन: विवेचना में बरी करा लिया। इसके बाद एक बार इन पर इगलास क्षेत्र में ही एक लाइसेंस पर कई-कई ठेके चलाने का आरोप लगा। उसमें भी कार्रवाई हुई। मगर कभी तगड़ा शिकंजा नहीं कसा गया। इस बार अनिल ने अपनी पत्नी को रालोद के बैनर से जिला पंचायत जिताया है।

ऋषि-मुनीष के नाम भी कई बड़े कारनामे :- जवां के रहने वाले दोनों भाइयों पर भी समय-समय पर इसी तरह के आरोप लगते रहे हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से बड़ी मात्रा में नकली शराब बनाने का धंधा पुलिस ने पकड़ा। उसमें इनके नाम आए। मगर सियासी रसूख से बच गए। इसके बाद छेरत के एक ठेके पर गलत माल आबकारी छापे में पकड़ा गया। उसमें भी सियासी रसूख से ये बच गए। इनके पास भी कई-कई ठेके रहते हैं। इसलिए चर्चा रहती है कि ये इस तरह की शराब तैयार कराकर अपने ठेकों पर बिकवाते हैं। ऋषि की पत्नी निवर्तमान ब्लाक प्रमुख हैं। इस बार खुद ऋषि ने बीडीसी का चुनाव जीता है और प्रमुख पद के लिए जवां से दावेदारी कर रहे थे। 

अनिल व ऋषि मिलकर करते हैं ये गोरखधंधा
इन दोनों जोड़ियों के अहम किरदार अनिल व ऋषि हैं। ये दोनों मिलकर ये गोरखधंधा करते हैं। गोंडा-लोधा क्षेत्र में जितने देशी शराब के ठेके हैं। आज की घटना के बाद पुलिस जांच में आया है कि उनमें अधिकांश ठेके अनिल के अपने लोगों के हैं या फिर अनिल का माल वहां जाता है। इसी तरह अनूपशहर रोड इलाके के अधिकांश ठेके ऋषि की निगरानी में संचालित होते हैं और उसके अपने लोगों के होते हैं। इसलिए वहां उसका माल सप्लाई जाता है। पुलिस का मानना है कि ये दोनों मिलकर यह धंधा करते हैं।

हमारी 6 पुलिस टीमें सुबह से इस कांड की गहराई से जांच व आरोपियों की तलाश में लगी हैं। अब तक की जांच में साफ हुआ है कि ठेकों पर अनिल व ऋषि ही मिलावटी व अवैध शराब बिकवाते हैं। इनका तगड़ा नेटवर्क है। इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा। पूर्व में इन्हें कैसे मदद मिलती रही। ये भी जांच का हिस्सा रहेगा।
- कलानिधि नैथानी, एसएसपी
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मुखबिर का काम करते हैं आबकारी वाले

इनका नेटवर्क किस कदर मजबूत है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आबकारी वाले इनके लिए मुखबिरी का काम करते हैं। शुक्रवार को घटनास्थल पर ही खैर व गोंडा तक के लोग पहुंचे थे। वहां कुछ लोगों ने इस बात के साक्ष्य सहित उदाहरण पेश किए कि जब भी हम लोग इलाके में अवैध शराब बिक्री या बनने की सूचना आबकारी तक पहुंचाते हैं तो पता चलता है कि आबकारी वालों ने उल्टा उस धंधा करने वाले को खबर देकर वहां से माल हटवा दिया। इससे साफ है कि किस तरह आबकारी की मिलीभगत रही होगी।

क्यों चेक नहीं की जाती दुकानें
यह सवाल यहां खड़ा हो रहा है कि आबकारी का काम यही है कि वह समय-समय पर औचक तरीके से दुकानों को चेक करे। ताकि पता चल सके कि कहीं गलत माल तो नहीं बिक रहा। यहां हुई घटना इसी का परिणाम है। अगर समय समय पर दुकान चेक होती तो शायद यहां ठेकों से यह अवैध शराब नहीं बिकती।

आखिर क्यों दबा दी गई एक माह पहले पुष्पेंद्र की मौत
गांव करसुआ में सुबह जब अमर उजाला टीम पहुंची और वहां लोगों से बातचीत शुरू हुई तो गांव की सुषमा नाम की महिला ने बताया कि 30 अप्रैल को उनके सगे भाई पुष्पेंद्र की इसी ठेके से देशी शराब खरीदकर पीने से मौत हुई थी। उसकी तीन बेटियां रह गई हैं, जिनका अब कोई सहारा नहीं है। उसकी मौत के बाद उन्होंने लगातार शिकायत की। आबकारी अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाई गई। मगर किसी ने सुनवाई नहीं की और हम थककर चुप बैठ गए।

अगर उस समय हमारी शिकायत का संज्ञान ले लिया गया होता तो शायद आज यह माहौल न बनता। वे आज की इस घटना को लेकर आबकारी को ही जिम्मेदार ठहराती हैं। गांव के कुछ लोगों को भी वे इसके लिए जिम्मेदार ठहराती हैं। वे कहती हैं कि गांव के कुछ लोगों ने भी उन्हें चुप रहने के लिए कहा था।

 
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