तभी आसिफ ने पीछे से आकर यह कहते हुए अंसार के सिर में गोली मार दी कि उसने न तो रुपये दिए। फिर बाइक देने से भी इन्कार कर दिया। साथ में परिजनों से शिकायत भी कर दी। मेडिकल कॉलेज में अंसार को मृत घोषित कर दिया। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेजने व चार्जशीट की प्रक्रिया पूरी की। इसी मामले में सत्र परीक्षण में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर दोषी करार देकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अर्थदंड की आधी राशि पीडि़त पक्ष को देने के आदेश दिए हैं।
हत्या में प्रयुक्त हथियार रखने में बरी, मानी पुलिस लापरवाही
इस मामले में अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी रविकांत शर्मा व हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि पुलिस ने मुकदमे में प्रयुक्त हथियार बरामद करते हुए आरोपी पर एक मुकदमा आर्म्स एक्ट में भी दर्ज किया। जिसकी फर्द में बरामद हथियार का बोर जो था, उसकी फॉरेंसिक रिपोर्ट में हथियार का बोर कुछ अन्य था। अदालत में जो हथियार पेश किया गया, वह खुला हुआ व फायर योग्य न था। विवेचक ने गवाही में भी यह तथ्य स्वीकारा। इस आधार पर अदालत ने इसे पुलिस लापरवाही व कार्रवाई की संस्तुति योग्य मानते हुए आसिफ को आर्म्स एक्ट में बरी किया, जबकि चश्मदीदों की गवाही पर हत्या में दोषी करार देकर सजा सुनाई है।