फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बुजुर्ग अधिवक्ता दंपती हत्याकांड: जिसे गोद लिया, पालन-पोषण किया, निकाह कराया, उसी ने रचा मौत का तांडव

Thu, 15 Feb 2024 09:11 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

नि:संतान अधिवक्ता दंपती ने एक बच्ची को गोद लिया और उसका पालन-पोषण बड़े लाड़ से किया। बड़े होने पर उसका धूमधाम से निकाह कराया। उस बच्ची ने आठ साल पहले उन्हीं मां-बाप को अपने भाई और अन्य के साथ मिलकर मौत के घाट उतार दिया। अदालत ने मामले में बहन-भाई समेत पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
विज्ञापन
मृतक अधिवक्ता मो.याहया उमर और उनकी पत्नी अजीज फातमा - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अलीगढ़ के मेडिकल रोड दोदपुर इलाके में आठ वर्ष पहले हुए बुजुर्ग अधिवक्ता एमवाई उमर दंपती हत्या-लूटकांड में पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा से दंडित किया गया है। इस बहुचर्चित कांड में यह फैसला 15 फरवरी को एडीजे-प्रथम संजीव कुमार सिंह प्रथम की अदालत ने सुनाया है। खास बात यह है कि नि:संतान अधिवक्ता दंपती ने जिस बच्ची का पालन पोषण कर उसका निकाह कराया था, उसी ने अपने भाई की मदद से साजिश रचकर हत्याकांड को अंजाम दिलाया था। 

विज्ञापन


अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी जेपी राजपूत के अनुसार, घटना 24/25 मई 2016 की रात की है। वादी मुकदमा सिविल लाइंस मेडिकल रोड दोदपुर, सफीना अपार्टमेंट से पहले वाली गली निवासी मीर आरिफ अली ने 25 मई को मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें कहा गया कि उनके बगल वाले मकान नंबर 4/1460 में बुजुर्ग अधिवक्ता मो.याहया उमर (75) और उनकी पत्नी अजीज फातमा (70) रहते हैं। 25 मई की सुबह करीब 11 बजे अधिवक्ता के यहां काम करने आने वाली रिहाना ने हमारे घर पर दस्तक देकर बताया कि अधिवक्ता दंपती को घर में किसी ने मार दिया है और सामान बिखरा पड़ा है। सूचना पर इलाका पुलिस आ गई और जांच-पड़ताल के बाद लूट के दौरान गला दबाकर दंपती की हत्या होना पाया गया। 

पुलिस ने 7/8 जून की रात मौलाना आजाद नगर में मुख्तार के घर से शाइस्ता उर्फ कल्लो, संतोष, किशोरी व नौमी को लूटे गए माल, घड़ियों आदि के साथ गिरफ्तार किया था। बाद में शाइस्ता के भाई मुख्तार को भी लूटी गई नकदी सहित गिरफ्तार किया। कुछ दिन बाद सराफ ललित को पकड़ा, मगर उसके पास से माल बरामद नहीं हो सका। इसके बाद पुलिस ने सभी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।  
विज्ञापन


 न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान साक्ष्यों व गवाही के आधार पर ललित को दोषी नहीं पाया जा सका। कोई माल बरामद न होना, उसके बरी होने का आधार बना। बाकी सभी को दोषी करार दिया गया, जिसमें शाइस्ता को साजिश के आरोप में दोषी करार देकर उम्रकैद व 27 हजार रुपये जुर्माना, जबकि अन्य चारों को हत्या व लूट में उम्रकैद व 35-35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इस दौरान किशोरी जमानत पर था, जिसे अभिरक्षा में लिया गया। बाकी चारों जेल से तलब हुए थे। सजा के बाद सभी को जेल भेज दिया गया।

विज्ञापन

इन्हें सुनाई गई सजा

  1. संतोष हाल निवासी माबूद नगर मूल निवासी हरिदासपुर, लोधा।
  2. नौमी सिंह निवासी नवीपुर खुर्द, हाथरस।
  3. किशोरी निवासी हरिदासपुर, लोधा।
  4. मुख्तार खां निवासी मौलाना आजाद नगर, क्वार्सी।
  5. शाइस्ता उर्फ कल्लो जीवनगढ़ गली नंबर एक, क्वार्सी।

ये बरी
ललित उर्फ ललतेश निवासी कस्बा दादों। (हाथरस के कस्बा सादाबाद का सराफ, जिस पर लूटे गए जेवर खरीदने का आरोप)

इस दोहरे हत्याकांड में शाइस्ता (जिसे मृतक दंपती द्वारा पाला गया था) द्वारा आपराधिक साजिश रचकर घटना को अंजाम दिलाया गया। बेशक घटना का कोई चश्मदीद साक्षी नहीं था। मगर हमने कुल नौ गवाह पेश किए। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर कड़ियों को जोड़ा गया। उनके पास से मृतकों की घड़ी, मोबाइल व रुपया बरामद होना और सीसीटीवी कैमरों में कैद होना बड़ा आधार बना। पूरी घटना को अभियोजन ने साबित किया। उसी के चलते अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। -जेपी राजपूत, एडीजीसी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें