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अलीगढ़ः बी-फार्मा छात्र की हत्या में चचेरे भाई सहित चार को उम्रकैद

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मडराक के बी-फार्मा छात्र की वर्ष 2019 में हुई बहुचर्चित हत्या के मुकदमे में चचेरे भाई सहित चार आरोपियों को अदालत ने उम्रकैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला एडीजे-आठ अशोक भारतेंदु की अदालत से सुनाया गया है। खास बात यह है कि यह मुकदमा अदालत ने 2 वर्ष 22 दिन में निस्तारित किया है। साथ में जुर्माना राशि में से 50 फीसदी राशि पीड़ित परिवार को देने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी को भी जुर्माना संबंधी प्रक्रिया कराने के निर्देश दिए हैं।
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अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी मेपे सिंह के अनुसार वादी मडराक निवासी आयुर्वेदिक चिकित्सक रमाकांत शर्मा का बड़ा बेटा 18 वर्षीय चंद्रमोहन उर्फ राघव हनुमान चौकी स्थित निजी कॉलेज से बी-फार्मा कर रहा था और नीट की तैयारी कर रहा था। 13 अक्तूबर 2019 की शाम उनका बेटा राघव घर से किसी दोस्त के पास लैपटॉप लेने जाने की कहकर निकला। फिर नहीं लौटा और बाद में उसका मोबाइल भी बंद हो गया। बेटे की तलाश करते हुए पिता ने 14 अक्तूबर को उसके गायब होने की सूचना थाने में दर्ज कराई। इसी बीच कस्बे में खाद-बीज की दुकान के संचालक के जरिये जानकारी मिली कि 13 अक्तूबर की शाम राघव को उसके कस्बा निवासी दोस्त किरन गौड़ के संग बाइक पर बैठे हनुमान चौकी की ओर जाते देखा गया है। साथ में उसके पीछे शाहपुर मडराक का बॉबी कुशवाहा नाम का युवक भी बैठा था।
इस जानकारी पर पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए किरन गौड़ को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो भेद खुल गया। उसने राघव की हत्या करना स्वीकारते हुए 15 अक्तूबर को हरदुआगंज क्षेत्र में ऊंटगिरी गांव के जंगल में माछुआ नहर के पास से लाश बरामद कराई। साथ में उसके दोस्त बॉबी कुशवाहा, उसके मामा का बेटा ऊंटगिरी हरदुआगंज का संतोष व राघव के सगे चाचा का बेटा सूरज शर्मा भी गिरफ्तार किया गया। चारों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि सूरज के कहने पर किरन, बॉबी उसे बातों में लगाकर अगवाकर अपने साथ ले गए और घटनास्थल पर बीयर आदि पीने के दौरान संतोष की मदद से चाकुओं से गोदकर हत्या की। साथ में फावड़े से गड्ढा खोदकर शव उसमें दबा दिया। उन्होंने राघव का मोबाइल, चाकू, फावड़ा आदि भी बरामद कराए। न्यायालय ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर चारों आरोपियों किरन गौड़, बॉबी कुशवाहा, संतोष व सूरज शर्मा को उम्रकैद और 19-19 हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया है। साथ में 50 फीसदी राशि पीड़ित को देने के आदेश दिए हैं।
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ये थी एक थप्पड़ की रंजिश, दो लाख में कराई हत्या
एडीजीसी के अनुसार पुलिस जांच, साक्ष्यों व गवाहों के बयानों के आधार पर साफ हुआ कि मृत राघव के चाचा की 2008 में मौत हो गई थी। उनका इकलौता बेटा सूरज परिवार की सासनी क्षेत्र के गांव सिंघर्र की 14 बीघा जमीन में अपने हिस्से को लेकर गलतफहमी पाले हुए था। वह कहता था कि ताऊ यानी राघव के पिता उसमें से उसे हिस्सा नहीं देंगे, जबकि दस्तावेजों में उसका नाम दर्ज था। घटना से करीब दो माह पहले सूरज शराब के नशे में अपने चाचा यानी मृत राघव के पिता की दुकान पर पहुंचा था। जहां उसने अपने चाचा से अभद्रता व धक्का मुक्की की थी। यह देख उम्र में छोटे राघव को इस बात पर गुस्सा आ गया कि सूरज उसके पिता से अभद्रता कर रहा है। इस पर राघव ने सूरज के थप्पड़ जड़ते हुए धकियाकर उसे दुकान से बाहर कर दिया। इस बात पर वह उसी समय यह धमकी देकर गया था कि तुझे जिंदा नहीं छोड़ेगा। इसके बाद उसने राघव के दोस्त किरन गौड़ को राघव की हत्या के लिए तैयार किया और उसे दो लाख रुपये सुपारी देना तय किया। यह बात खुद किरन ने स्वीकारी। मगर हत्या होने तक सुपारी की रकम नहीं मिल पाई थी।
कोर्ट ने माना जघन्य अपराध, अभियोजन ने मांगी फांसी
एडीजीसी मेपे सिंह के अनुसार अक्तूबर 2019 का यह मुकदमा न्यायालय में 2 जनवरी 2020 को सत्र परीक्षण के लिए शुरू हुआ। इसके बाद मात्र 2 वर्ष 22 दिन में यानी 24 जनवरी 2022 को अदालत ने यह फैसला सुनाया है, जिसका उल्लेख खुद अदालत ने अपने आदेश में किया है। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने सभी साक्ष्यों व गवाही के आधार पर इसे जघन्य अपराध मानते हुए फांसी की मांग की, जिस पर न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में इसे जघन्य अपराध माना और कहा कि इस तरह की घटनाओं से समाज में भय का वातावरण पैदा होता है। इसलिए इस घटना के आरोपियों को उम्रकैद की सख्त सजा से दंडित किया जाना उचित है। ताकि समाज में एक संदेश जाए।
फांसी होनी थी, छीन ली मेरे बुढ़ापे की लाठी : रमाकांत
पेशे से आयुर्वेदिक चिकित्सक रमाकांत खुद एक पैर से दिव्यांग हैं। कैंसर में उनका एक पैर कुछ वर्ष पहले कट गया था। सासनी गेट सराय गढ़ी में अपनी प्रेक्टिस करने वाले रमाकांत बताते हैं कि उनकी शादी पारिवारिक कारणों से विलंब से हुई। इसलिए बच्चे भी देर से हुए। सबसे बड़ा राघव उनके बुढ़ापे की लाठी बनने लगा था। अपने व्यापार का ही आगे बढ़ाने के इरादे से उसे बी फार्मा करा रहा था। नीट की भी तैयारी कर रहा था। मगर सूरज ने मात्र गलतफहमी में अपने मन में यह खुन्नस पाल ली कि उसे जमीन नहीं मिलेगी, जबकि आज भी उसका नाम उस जमीन पर दर्ज है। इसी विवाद में उसने एक थप्पड़ के बदले मेरे बेटे की हत्या कर मुझे बेसहारा कर दिया। हालांकि अभी मेरे दो और बेटे ब्रजमोहन, धर्मेंद्र व दो बेटियां लक्ष्मी व रिचा हैं। मगर अभी चारों नाबालिग व छोटे हैं। मैं तो चाहता था कि इनको फांसी हो। फिर भी अदालत ने जो फैसला सुनाया है, उससे संतुष्ट हूं। वहीं रमाकांत की पत्नी विनीता कहती हैं कि आरोपी सूरज ने यह धमकी दी थी कि इस बार होली नहीं मनाने दूंगा। मगर उससे पहले दीपावली से पहले ही वारदात को अंजाम दिया गया था। वह दिन कभी नहीं भूल पाऊंगी।
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