डाकिया डाक लाया... एक वक्त था जब यह आवाज घरों में उत्सुकता बढ़ा देती थी। मोबाइल और इंटरनेट के दौर में चिट्ठियों वाला जमाना यादों का हिस्सा बन चुका है। चिट्ठी, पोस्टकार्ड, अंतरदेशीय पत्र अब बहुत कम नजर आते हैं। इसके बावजूद डाक विभाग की भूमिका घटने के बजाय बढ़ गई है।
डाक सेवाओं के महत्व के प्रति जन जागरूकता के लिए हर वर्ष 9 अक्तूबर विश्व डाक दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर आज नजर डालते हैं डाक सेवा की बदली हुई भूमिका, डाक विभाग के नेटवर्क और इनके महत्व पर। आज के दौर में लोग एक-दूसरे से चिट्ठियों के जरिये हाल-चाल नहीं लेते। सीधे वॉयस या वीडियो कॉल पर बात कर लेते हैं। पत्र सेवाओं का इस्तेमाल घटने के साथ डाक विभाग ने खुद को बदलना शुरू किया। आज बदला हुआ विभाग हमारे सामने हैं। डाकघरों में अब सिर्फ चिट्ठी या पार्सल की बुकिंग ही नहीं होती, बल्कि 200 तरह की सेवाएं एक ही छत के नीचे मिलती हैं।
आज भी सबसे विश्वसनीय सेवा
डाक विभाग के अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल दौर में डाक विभाग का महत्व बरकरार है। आज भी पत्र, अभिलेख, पार्सल भेजने के लिए भारतीय डाक सेवा को सबसे विश्वसनीय माना जाता है। यही वजह है कि महत्वपूर्ण कागजात लोग डाक विभाग के जरिये भेजते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन भी कूरियर की जगह डाक विभाग के जरिये मंगाए जाते हैं।
चिट्ठियों में होता था अपनों का हाल
चिट्ठी पत्री का दौर याद करते हुए गभाना के श्यामबाबू शर्मा बताते हैं कि करीब 20 साल पहले डाकिया और चिट्ठी का बेसब्री से इंतजार रहता था। उस समय दिन में दो-तीन चिट्ठियां लिखना भी सामान्य बात थी। सासनीगेट के हेमंत जैन बताते हैं कि पहले डाकिया घरों में खुशियों का पैगाम लेकर आते थे। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में डाकिया को सम्मान की नजर से देखा जाता था। चिट्ठियां सिर्फ संदेश नहीं, बल्कि अपनों के हर पल की खबर साथ लेकर आती थीं।
डाकघर में अब इतनी तरह की सेवाएं
डाक विभाग ने समय के साथ अपनी सेवाओं का दायरा बढ़ाया है। आधार कार्ड बनवाने और अपडेट कराने, विभिन्न बिलों के भुगतान, गंगाजल, पासपोर्ट, निर्वाचन संबंधी सेवाओं, टूर एंड ट्रैवल्स, एयर टिकट, रेलवे टिकट, बस टिकट, आईटीआई रजिस्ट्रेशन, फास्टैग, विभिन्न प्रकार के बीमा, एईपीएस और आईटी रिटर्न मिनी सेवा, बैंकिंग समेत 200 सेवाएं डाकघरों में उपलब्ध कराई जा रही हैं।
जिले में डाक विभाग से जुड़ीं खास बातें
51 वर्ष पहले 1975 में खुला था अलीगढ़ में पहला डाकघर
80 डाकघर संचालित हैं अलीगढ़ और हाथरस जिले में
403 डाकघरों की उपशाखाएं भी कार्य कर रहीं
65 सेक्टरों में बांटा गया है शहर को डाक वितरण के लिए
75 पोस्टमैन रोज डाक और पार्सल का वितरण करते हैं
4000 से अधिक साधारण डाक का रोज होता है वितरण
6000 से अधिक पंजीकृत डाक रोज वितरित की जाती है
8000 से ज्यादा पंजीकृत डाक की रोज होती है बुकिंग
400 से ज्यादा पार्सल बुक होते हैं डाकघरों के जरिये
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वर्जन
डाक विभाग अब केवल साधारण या रजिस्टर्ड डाक और पार्सल की बुकिंग एवं वितरण तक सीमित नहीं है। आधार बनाने और अपडेट करने से लेकर विभिन्न प्रकार के बिल भुगतान, टिकट, बीमा, एईपीएस और आईटी रिटर्न मिनी सेवा समेत 200 सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा रही हैं।
-विनय वार्ष्णेय, वरिष्ठ प्रवर डाक अधीक्षक
इसलिए नौ अक्तूबर का दिन है खास
नौ अक्तूबर 1874 में स्विट्जरलैंड के बर्न शहर में सार्वभौमिक डाक संघ (यूपीयू) की स्थापना हुई थी। इस संघ की वर्षगांठ की याद में प्रत्येक वर्ष 9 अक्तूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है। विश्व डाक दिवस का उद्देश्य लोगों और व्यवसायों के दैनिक जीवन में डाक की भूमिका और वैश्विक सामाजिक और आर्थिक विकास में इसके योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।