धनीपुर एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण का जिम्मा संभाले लेखपाल जरूर भ्रष्टाचार के आरोप में जेल चला गया है, मगर अभी बहुत से सवालों के जवाब तलाशे जाने हैं। इनमें सबसे ज्यादा वह लोग परेशान हैं, जिनकी शिकायतों व आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं हुआ और वह आज भी पूछ रहे हैं कि आखिर उनके मामलों का निस्तारण कौन करेगा। अकेले इसी लेखपाल के इलाके में करीब पचास आपत्तियां व शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों के यहां दाखिल हैं।
यह लेखपाल नारायण प्रताप सिंह गांव खनगढ़ी में तैनात था और धनीपुर एयरपोर्ट के लिए इस गांव की सर्वाधिक भूमि का अधिग्रहण हो रहा है। वहां के किसानों से बैनामे कराने का जिम्मा निभा रहा था। इस गांव से करीब पचास शिकायतें व आपत्तियां अधिकारियों से लेकर आईजीआरएस पोर्टल तक दाखिल हैं।
किसी शिकायत में आरोप है कि किसी की जमीन का जबरन बैनामा कराकर माफिया ने खुद एयरपोर्ट प्राधिकरण को बैनामा कर दिया है। इसके अलावा, प्लाटिंग के नाम पर बैनामे के बाद भी किसान ने ही एयरपोर्ट को बैनामा कर दिया। कुछ में आरोप था कि भूमि पट्टे में आवंटित थी, पहले उसकी प्लाटिंग कर दी और अब एयरपोर्ट को बैनामा कर दिया। कुछ गाटा नंबरों में जबरन एयरपोर्ट के नाम बैनामा करने का आरोप है। इसी तरह की शिकायतें पिछले चार माह में एसडीएम से लेकर जिला अधिकारी और आईजीआरएस पोर्टल तक दाखिल की गई हैं।
इन आपत्तियों के बावजूद उस इलाके में बैनामे जारी रहे और किसी आपत्ति का आज तक निस्तारण नहीं हुआ। अब लेखपाल के जेल जाने के बाद बेशक जिलाधिकारी स्तर से वहां दो-दो एडीएम स्तर के अधिकारियों को कैंप कर बैनामे कराने के निर्देश दिए हैं। मगर सवाल है कि आखिर उन आपत्तियों व शिकायतों का निस्तारण कौन करेगा? और कब होगा? इसका जवाब कोई नहीं दे रहा है। वहीं, आपत्ति व शिकायत दाखिल करने वाले किसानों या भूस्वामी अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
इसके अलावा इस लेखपाल के विषय में एक नई जानकारी आई है कि वह मूल रूप से तैनाती वाले इलाके के पास के गांव का रहने वाला था। मगर नौकरी में उसने अपना मूल व स्थायी निवास सरोज नगर एटा चुंगी दर्ज करा रखा था। ऐसे में साफ है कि कहीं न कहीं लेखपाल इलाके के भूमाफिया व दलालों का करीबी रहा और उसने यह पूरा खेल किया।