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डिस्टलरी में नौकरी करके सीखा काम...फिर करने लगा तस्करी

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अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
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जहरीली शराब से मौत का तांडव मचाने वाले मैनपुरी के मूल निवासी विपिन उर्फ ओमवीर यादव की करतूतें नई नहीं है। वह और उसकी पत्नी जहरीली शराब बनाने के माहिर हैं। खुद हरियाणा की एक डिस्टलरी में नौकरी करके उसने ये सब सीखा और फिर अलीगढ़ आकर इस कारोबार में हाथ आजमाया। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अगर उसके शुरुआती दौर पर गौर करें तो उसके दोस्त खर्चे के लिए उसकी मदद किया करते थे। मगर आज इस सिंडिकेट से उसने बेशुमार संपत्ति बना ली है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार यह बातें खुद विपिन से पूछताछ और उसके विषय में हुई जांच में सामने आई हैं। 2012-13 तक वह हरियाणा की शराब फैक्टरी (डिस्टलरी) में नौकरी करता था। इसी बीच वह वहां से किसी तरह केमिकल चोरी करके लाने लगा और अकराबाद क्षेत्र के ही रहने वाले किसी दोस्त की मदद से यहां उसने अपना कारोबार जमाना शुरू किया।
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पहले वह नौकरी भी करता था और यहां अलग-अलग गांवों में मिलावटी शराब बनाकर बेचने का धंधा भी करता था। माल की सप्लाई देने के फेर में उसके संपर्क जिले के बड़े शराब माफिया अनिल व ऋषि से हो गए। इसके बाद उसने इनकी मदद से इलाके में फैक्टरी शुरू की और इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
जानकार बताते हैं कि अधौन, सिकंदरपुर आदि गांवों में वह ठिकाने बदल-बदलकर यह धंधा करता था। इस दौरान उसे सियासी सरपरस्ती इलाके के ही कुछ नेताओं से सत्ता के अनुसार मिलती रही है। किसी को वह साझेदार बनाता है तो किसी को मनमर्जी हिस्सा पहुंचाता है। जानकार बताते हैं कि इस धंधे में उसकी पत्नी की भी सक्रिय भूमिका रहती है। पहले वह खुद साथ शराब बनवाती थी। अब वह उसकी व उसकी टीम के लोगों की पैरोकारी सक्रिय तरीके से करती है।
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पीआईएल की तैयारी में जुटे अधिवक्ता
इस प्रकरण में अधिवक्ता अनूप कौशिक ने बताया कि वे पूरे प्रकरण का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। चूंकि मामले में प्रशासन के स्तर से मौतों के तथ्य छिपाने से लेकर इस कांड के लिए जिम्मेदार अफसरों पर मुकदमा दर्ज न करने का कदम उठाया गया है। वे तथ्यों को संकलित कर मामले में पीआईएल दाखिल करने की तैयारी में हैं। साथ में उनकी मांग रहेगी कि इस कांड की जांच यूपी की किसी एजेंसी से न कराकर केंद्र की किसी एजेंसी से कराई जाए। ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।
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