नदीपुरा निवासी राजेंद्र साहू के घर में चार, पांच फीट पानी था। उनका कहना है कि पानी के कारण टुल्लू और एलसीडी खराब हो गई। वहीं, अलमारी में रखे कपड़े गीले हो गए। जब बांध का पानी कम हुआ तो घर में जगह-जगह गंदगी पसरी थी। रात भर ऊपरी मंजिल में जागकर निकाली। मछली मार्केट में पांच फुट से ऊपर पानी था। देर शाम स्थिति बिगड़ते देख नाव का इंतजाम किया गया।
ये भी पढ़ें- उत्तराखंड: नौ जिलों में दो दिन भारी बारिश का खतरा, बागेश्वर में मकान ढहा, चार लोग नदी में बहे
जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने स्थिति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए। एसडीएम मो. कमर को मोहल्ला रावतयाना, गोविंद नगर, एसडीएम ज्ञानेश्वर प्रसाद को मोहल्ला खिरकापुरा, आरएमवी कांशीराम कालोनी, एसडीएम पाली राजेंद्र बहादुर को मोहल्ला चौबयाना, भीमनगर, एसडीएम रमेश चंद्र को मोहल्ला नदीपुरा, तालाबपुरा में लगाया गया।
वहीं, एसडीएम नरेंद्र सिंह को विस्थापित व्यक्तियों को जिस स्थान पर रखा जाएगा, वहां ईओ नगर पालिका के साथ भ्रमण कर उनके खानपान, रहने की समुचित व्यवस्था करेंगे। प्रदेश के श्रम सेवायोजन मंत्री मनोहरलाल पंथ ने भी बांध के खुले गेटों से उत्पन्न स्थिति का जायजा लिया। सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, नगर पालिका अध्यक्ष रजनी साहू के पति घनश्याम साहू ने भी डूब क्षेत्र का भ्रमण किया। उधर, शुक्रवार की सुबह राजस्व विभाग के कर्मियों ने नुकसान का आंकलन का करने के लिए सर्वे प्रारंभ कर दिया है।
प्रभावित लोग देखते ही सरकारी कर्मियों की राह
जिस समय साइफन का पानी बस्तियों में घुस रहा था, उस दौरान सरकारी कर्मचारी डूब क्षेत्र में नहीं पहुंचे। इस कारण लोगों को खुद ही पानी से बचाव करना पड़ा। कई लोगों को घंटों भोजन, पानी भी नसीब नहीं हुआ। इस बात को लेकर लोगों में नाराजगी देखी गई। हालांकि, देर रात प्रशासनिक अमला हरकत में दिखा, तब जाकर स्थिति में सुधार दिखा।