अलीगढ़। सन् 1965 के युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त देकर देश का सिर ऊंचा करने वाले भारत के तत्तकालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री 1964 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। तब उन्हें एएमयू की ओर से एलएलडी की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था।
इस कार्यक्रम में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के जनक एवं महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा डीएससी, डॉ. अलबर्ट लिलर डीडीएल एवं उत्तर प्रदेश के तत्कालीन खाद्य मंत्री डॉ. गेंदा सिंह भी डीलिट की मानद उपाधि से सम्मानित किए गए थे। उस समय एएमयू के कुलपति बीएफएचबी तैयब थे। नवाब अहमद सईद खान ऑफ छतारी ने समारोह की अध्यक्षता की थी।
एएमयू में आज भी लोग गर्व से लाल बहादुर शास्त्री के आगमन को याद करते हैं। वे महान नेता ही नहीं, उन्होंने वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित कर देश में हरित क्रांति एवं श्वेत क्रांति की भूमिका तैयार की थी। एएमयू के भौतिक विज्ञानी एवं अंतरराष्ट्रीय एलिस प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर प्रो. इरफान बताते हैं कि 1964 में वह बीएससी के छात्र थे। एनसीसी कैडेट के रूप में दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे और मंच के करीब बैठे थे। वह प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को लेकर काफी उत्साहित थे। वे सादगी की प्रतिमूर्ति थे।
उनकी तेजस्विता उनके चेहरे से झलकती थी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन मैकडोनाल्ड हॉस्टल एवं क्रिकेट ग्राउंड के समीप हुआ था। उस समय वहां भूगोल विभाग स्थित था। लाल बहादुर शास्त्री के साथ डॉ. होमी जहांगीर भाभा भी समारोह में शामिल हुए थे।