ब्रास (कापर, पीतल व जस्ता मिक्स) निर्मित यह मूर्ति देश में कहीं और नहीं बनती। यहां की मूर्ति की अपनी एक पहचान है। यहां की मूर्ति अंदर से खोखली मूर्ति वेल्डिंग के साथ बनाने की कला है। दक्षिण भारत में ठोस मूर्ति बनाई जाती हैं, जो वजनी और कीमती भी होती है। पीतल नगरी मुरादाबाद के कारोबारी भी यहां से ऑर्डर पर मूर्ति बनवाकर मंगाते हैं। शहर के कुछ इलाकों में यह कुटीर उद्योग के रूप में चल रहा है। यहां पीतल की चादर या सिल्ली की दो तरह से मूर्ति बनती हैं। इसमें सबसे महीन काम हाथ की दस्तकारी चिताई के जरिये डिजाइन बनाई जाती है। सामान्य दिनों में यहां विभिन्न प्रकार की मूर्तियां बनती हैं। इन दिनों लड्डू गोपाल की मांग के अनुसार उन्हें ज्यादा बनाया जा रहा है।
यहां तक सप्लाई
दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट, कर्नाटक के अलावा यूपी के अधिकांश शहरों में मूर्ति की आपूर्ति होती है। इनकी मुरादाबाद, मथुरा, वृंदावन में सर्वाधिक आपूर्ति होती है। ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी मूर्तियां बिक रही हैं। कनाडा, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, आस्ट्रेलिया, फ्रांस, दुबई में रहने वाले भारतीयों के बीच इनकी मांग है। इसके अलावा इस्कॉन के स्टॉलों पर भी इनकी आपूर्ति लार्ड कृष्णा के नाम से होती है।
लड्डू गोपाल बनाने में जुटे हैं मैराज
अतरौली वैसपाड़ा के मैराज खां सासनीगेट सराय भूखी में कारखाना चलाते हैं। वह अपने ससुर के कहने पर 1996 में अतरौली से मोटर मैकेनिक का काम छोड़कर आए थे। तभी से यहां परिवार के साथ मूर्तियां बनाते हैं।
इस बार चीन का विदेशी निर्यात पंद्रह अगस्त तक ड्यूटी मुक्त है। पंद्रह अगस्त के बाद चीन के माल पर तीस फीसदी का एंटी डंपिंग शुल्क लगेगा। इसलिए पंद्रह अगस्त के बाद विदेशों में चीन का माल महंगा होगा। हालांकि वहां एल्युमीनियम की मशीन से मूर्ति बनाकर बेची जा रही है। मगर सस्ती व भारतीय माल की अपेक्षा सुंदर होने के कारण उसकी मांग इस बार अधिक है। यहां का निर्यात आधे पर रह गया है। दूसरी वजह चीन ने ड्यूटी मुक्त का लाभ लेने के लिए 70 फीसदी से अधिक समुद्री कंटेनर बुक कर रखे हैं। वह भी 15 अगस्त के बाद फ्री होंगे। ऐसे में भाड़ा 1200 डॉलर टन से 7 हजार डॉलर टन तक पहुंच गया है। इसलिए भारतीय माल विदेश में महंगा है। 15 अगस्त के बाद कीमत गिरेंगी, तब ऑर्डर अधिक मिलने की उम्मीद है।
मूर्तियों का सालाना कारोबार एक नजर में
-500 करोड़ रुपये सालाना है पीतल मूर्ति का कारोबार
-150 करोड़ रुपये सालाना का है निर्यात
-35 निर्यातक विदेशी बाजार में बेचते हैं पीतल मूर्ति
-50 बड़े पीतल मूर्ति के हैं निर्माता
-50 हजार लोगों की जुड़ी है रोजी रोटी
-500 ढलाई और निर्माण यूनिट
मूर्तियों की कीमत में इजाफा
-900 रुपये किलो तक रेग्यूलर मूर्तियां, 100 रुपये महंगी
-1100 रुपये किलो तक फाइन मूर्तियां, 100 रुपये महंगी
-1200 रुपये किलो तक सुपरफाइन मूर्तियां-पत्थर युक्त, 50 रुपये महंगी
-1300 रुपये किलो तक अष्टधातु मूर्तियां, 50 रुपये महंगी
(पिछले वर्ष तक फाइन उत्पाद की कीमत 800 रुपये से शुरू थी)
इस वर्ष पीतल में ये इजाफा
- 450 रुपये किलो वाली पीतल इस वर्ष 525 रुपये किलो है।
- 200 ग्राम से 20 किलो वजन तक के बनते हैं लड्डू गोपाल।
महंगाई की वजह से जन्माष्टमी के ऑर्डर में अंतर
-7 करोड़ तक सिमटे पिछले वर्ष 10 करोड़ रुपये के कुल ऑर्डर
-2 करोड़ रुपये सिमटे पिछले वर्ष 5 करोड़ रुपये के निर्यात ऑर्डर