खून की कमी सिर्फ मां को ही नहीं, नवजात की जान को भी खतरे में डालती है। प्रसव के दौरान फरवरी में जिले में तीन महिलाओं की मौत हो चुकी है।
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक गर्भवती महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जिला महिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों के आंकड़े यही कह रहे हैं। यहां आने वाली 50 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी पाई जा रही है। 20 से 25 फीसदी महिलाओं में रक्त पांच से सात ग्राम प्रति डेसीलीटर तक पहुंच जाता है। जिसके बाद सुरक्षित प्रसव बहुत जटिल हो जाता है।
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 500 से 600 महिलाएं आती हैं। इनमें गर्भधारण करने वाली महिलाओं के अलावा बालिकाएं व अन्य महिलाएं शामिल हैं। इनमें से 50 फीसदी महिलाएं गर्भवती होती हैं। चिकित्सकों के अनुसार गर्भवती महिलाओं को नौ माह के भीतर कम से कम चार बार चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए आना ही चाहिए। इस दौरान उनके बीपी, शुगर, रक्त व यूरिन की जांच से बीमारियों की जानकारी होती है।
अधिकांश महिलाएं इस परामर्श को दरकिनार कर देती हैं, जिससे हाई रिस्क प्रेगनेंसी व प्रीम्योच्योर डिलिवरी की परेशानी होती है। पोषण की कमी, बार-बार गर्भधारण और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण एनिमिया का खतरा बढ़ जाता है, जिससे प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, समय पूर्व प्रसव, कम वजन वाले शिशु का जन्म और मां-बच्चे की मृत्यु का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। गौर हो कि बीते वर्ष 17 सितंबर से दो अक्तूबर तक सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर शिविर लगा कर जांच की गई थी। 15 दिनों के इस अभियान में 31 हजार महिलाएं एनिमिया से ग्रसित तो 1400 गर्भवती हाई-रिस्क प्रेगनेंसी की मिलीं। 368 महिलाएं शुगर से पीड़ित थीं।
हर माह 150 लीटर रक्त चढ़ाया जा रहा
अलीगढ़। गर्भवती महिलाओं में रक्त की कमी का अंदाजा ब्लड बैंक से हो रही इसकी खपत से लगाया जा सकता है। डॉ. चंचल वार्ष्णेय ने बताया कि रोजाना करीब 10 से 15 महिलाओं को रक्त चढ़ाना पड़ता है। एक यूनिट में तकरीबन 350 एमएल रक्त होता है। ऐसे में हर माह करीब पांच लीटर खून महिलाओं को चढ़ाया जाता है। महीने में लगभग 150 लीटर रक्त की जरूरत होती है। रक्त चढ़ाने में भी रिस्क होता है। अगर महिलाएं खानपान पर ध्यान दें तो रक्त की कमी दूर हो सकती है।
हीमोग्लोबिन
सामान्य महिलाओं में रक्त 12.0-15.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर
एनीमिया (खून की कमी) : 10 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम होने पर।
गर्भवती महिलाओं में रक्त पांच से छह ग्राम प्रति डेसीलीटर तक हो जाता है।
हीमोग्लोबिन शरीर में ऑक्सीजन के परिवहन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
रक्त की कमी (एनीमिया) के लक्षण
थकान और कमजोरी महसूस होना।
त्वचा का पीला पड़ना, सांस फूलना।
बार-बार चक्कर आना और थकान आना।
रक्त बढ़ाने के उपाय :
आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे पालक, अनार, चुकंदर, सूखे मेवे खाएं।
विटामिन सी युक्त भोजन करें।
महिला अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं में रक्त की कमी सामने आ रही हैं। उपचार या प्रसव कराने के लिए आने वाली 50 फीसदी महिलाएं एनीमिया से ग्रसित होती हैं। जिन्हें उपाय बताए जाते हैं, मगर सुधार नहीं हो पाता।
-डॉ. चंचल वार्ष्णेय, स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला महिला अस्पताल।
अस्पताल आने वाली 50 फीसदी महिलाओं में रक्त की कमी है। 10 से 15 फीसदी महिलाएं शुगर और बीपी की समस्या से जूझ रहीं हैं, इससे जच्चा-बच्चा दोनों की सेहत पर असर पड़ता है और बच्चे कमजोर होते हैं।
-डॉ. तैय्यब खान, सीएमएस जिला महिला अस्पताल।