शहर से 70 किलोमीटर दूर वृंदावन में 16 फरवरी से कुंभ मेला लग रहा है। कुंभ मेले के दौरान तीन शाही स्नान की तिथियां भी घोषित हो चुकी हैं। पहला शाही स्नान 27 फरवरी, दूसरा नौ मार्च व तीसरा शाही स्नान 13 मार्च को है। इगलास होकर वृंदावन 70 किलोमीटर दूर है। इस मार्ग का कुछ हिस्सा जर्जर है। जबकि इसके अलावा खैर-टैंटीगांव-मांट होते हुए 86 किमी पर सीधे कुंभ परिसर में पहुंच जाएंगे। खैर-टैंटीगांव-मांट से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए वृंदावन में यमुना नदी पर पीपा पुल तैयार किया गया है।
हरिद्वार कुंभ से पहले वृंदावन में भी कुंभ लगता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कुंभ मेले में स्नान करने का काफी महत्व है। जबकि शाही स्नान मुहूर्त में स्नान करने पर अमरत्व की प्राप्ति होती है। वृंदावन कुंभ मेले की समीक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर ली है। इसी कारण तैयारियों को अंतिम रूप भी दिया जा रहा है। संत-महंत व साधुओं ने मिलकर शाही स्नान की तिथियां भी घोषित कर दी हैं। वसंत पंचमी के दिन ध्वजारोहण के साथ कुंभ का शुभारंभ वृंदावन में होगा। इसके बाद पहला शाही स्नान माघी पूर्णिमा 27 फरवरी को होगा। द्वितीय शाही स्नान फाल्गुन कृष्ण पक्ष नौ मार्च को होगा, जबकि तीसरा शाही स्नान अमावस्या 13 मार्च को होगा। मेले का समापन रंगभरनी एकादशी को पंचकोसीय वृंदावन की परिक्रमा के साथ होगा। इसका फैसला महंत राजेंद्रदास महाराज, महंत रामजीदास महाराज, महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज, महंत धर्मदास महाराज, महंत मोहनदास, गौरीशंकर दास, रामकिशोर दास, महंत हरिशंकर दास महाराज के स्तर से लिया गया है। अगर आप भी वृंदावन कुंभ में हिस्सा लेना चाहते हैं तो खैर-टैंटीगांव-मांट होते हुए सीधे कुंभ परिसर में प्रवेश किया जा सकता है। वृंदावन में मांट मार्ग को जोड़ने के लिए पीपा पुल भी तैयार किया गया है। इससे राया के जाम और जर्जर सड़क से बचा जा सकता है।
- हरिद्वार के कुंभ का अपना ही महत्व है। इसी प्रकार हरिद्वार कुंभ से पहले वृंदावन कुंभ का भी महत्व है। यमुना पटरानी के घाट और उसके आसपास जहां भगवान की क्रीड़ा स्थली है। ऐसी भूमि में संतों का समागम होता है। यहां की परिक्रमा, पूजा-अर्चना, भजन-संकीर्तन, दानपुण्य, यज्ञ, कथा, भागवत, रासलीला-रामलीला आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं। इन सभी के साथ जब शाही स्नान मिलेगा तो और भी सौभाग्य रहेगा।
-महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज
- इगलास-राया होते हुए अगर वृंदावन जाया जाए तो बीच-बीच में सड़क काफी जर्जर है। वहीं राया में अगर जाम लग जाए तो घंटों खड़े-खड़े निकल जाते हैं। इसीलिए खैर-टैंटीगांव-मांट होते हुए वृंदावन जाने वाला रास्ता काफी अच्छा है। अब तो इस मार्ग को वृंदावन से जोड़ने के लिए पीपा पुल भी तैयार किया गया है। इससे सीधे कुंभ में पहुंच सकेंगे। वृंदावन कुंभ की मान्यताएं भी काफी प्रचलित हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री के बाद ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा तैयारियों का जायजा भी ले रहे हैं।
-पं. हृदय रंजन शर्मा, अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान