करीब चार दशक से नुमाइश की सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रही कृष्णांजलि नाट्यशाला इस बार कार्यक्रमों की मेजबानी नहीं कर सकेगी। आईआईटी बीएचयू ने अपनी जांच रिपोर्ट में इसे गतिविधियों के लिए असुरक्षित बताया है। ऐसे में इस बार नुमाइश के सांस्कृतिक और अन्य कार्यक्रम केवल कोहिनूर और मुक्ताकाश मंच पर ही आयोजित होंगे।
1984-85 में जिला पंचायत के सहयोग से कृष्णांजलि नाट्यशाला का निर्माण हुआ था। उस समय जिलाधिकारी ललित श्रीवास्तव और एडीएम सिटी बाबा हरदेव सिंह थे। कृष्णांजलि में वर्षों तक नाटक, संगीत, नृत्य, कवि सम्मेलन और दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहे। मंच पर कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ दर्शक दीर्घा में बैठी भीड़ नुमाइश की शामों का अहम हिस्सा रही।
2017 में कृष्णांजलि को आधुनिक ऑडिटोरियम में बदलने का प्रस्ताव सामने आया। इसके बाद वर्ष 2020 में नुमाइश समिति ने पुराने भवन को जर्जर घोषित करते हुए उसे गिराकर नया ऑडिटोरियम बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए करीब तीन करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किए जाने की बात सामने आई थी।
ऑडिटोरियम की है योजना
कृष्णांजलि नाट्यशाला की जगह बड़ा ऑडिटोरियम बनाया जा सकता है। यह आधुनिक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर होगा। इसकी योजना धरातल पर उतरने में समय लगेगा।
- आईआईटी बीएचयू की रिपोर्ट के अनुसार, कृष्णांजलि नाट्यशाला की संरचना मानव गतिविधियों के लिए सुरक्षित नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार नुमाइश में यहां कोई भी कार्यक्रम नहीं कराने का फैसला लिया गया है। - किंशुक श्रीवास्तव, एडीएम सिटी