दिनभर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का वृत रहने के बाद देर रात 12 बजे लगभग चांद निकलते ही मंदिर और घरों में पूजा, आरती होने लगी। चांद को अर्घ्य दिया गया और उसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। तदोपरांत व्रत रखने वालों ने भोजन किया।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 16 अगस्त को पूरे उल्लास व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। शहर से लेकर देहात तक हर ओर कान्हा के जन्म की धूम मची रही।
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घड़ी में रात के 12 बजते ही भगवान श्रीकृष्ण घर-घर में जन्मे। हर ओर बधाई गूंज उठी। बधाइयों के साथ ही पूजा-अर्चना हुई। इसके बाद आरती कर भोग प्रसाद बांटा गया। देर रात तक श्रीराधाकृष्ण के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। मंदिरों के बाहर मेले भी लगे। इस मौके पर भक्तों ने मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया-संवारा।
घरों के मंदिरों में भी हिंडोले बनाकर भव्य सजावट की गई। सुबह से ही भक्तों में उत्साह का वातावरण देखते ही बन रहा था। भक्तों ने लड्डू गोपाल का अभिषेक करने के साथ ही उन्हें पालने में झूला भी झुलाया। शहर भर में इस मौके पर धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित हुए। भक्तों ने श्रीकृष्ण के जन्म पर झांकी भी सजाईं।