सिविल लाइंस इलाके के हमदर्द नगर-बी निवासी एक युवक ने बुधवार रात को अपनी पत्नी की ईंट से सिर कुचलकर हत्या कर दी। हत्या के बाद उसने खुद ही पुलिस को सूचना देकर खुद को सरेंडर कर दिया। युवक ने बताया कि साढे़ तीन साल का बेटा भूख से व्याकुल होकर रो रहा था। पत्नी ने उसे दूध पिलाने के बजाय उठाकर फेंक दिया। यह देख गुस्सा आ गया। आवेश में आकर ईंट से उसका सिर कुचलकर हत्या कर दी।
वाकया रात करीब 12:30 बजे का है। शानू निवासी हमदर्द नगर-बी कमरे में अपनी पत्नी शायरा (25) और साढे़ तीन साल के बेटे आहद और पांच साल की बेटी इलमा के साथ सो रहा था। रात को आहद अचानक से उठा और भूख से रोने लगा। नींद आने के कारण शायरा ने आहद को दूध नहीं दिया। आहद रोने लगा तो शानू की भी आंख खुल गई। शानू ने भी शायरा से बेटे को दूध देने के लिए कहा। इसी बात से गुस्साई शायरा ने आहद को पलंग से उठाकर नीचे फेंक दिया।
पति-पत्नी में विवाद हो गया। इसी बीच शानू ने कमरे में रखी एक ईंट से शायरा के सिर पर कई वार कर दिए। इससे वह लहूलुहान हो गई। इसी बीच बेटी इलमा की आंख खुल गई। इलमा ने दादी शाईन को जाकर घटना बताई। शाईन और शानू, शायरा को अचेत हालत में जेएन मेडिकल कालेज लेकर गए।
वहां डाक्टरों ने शायरा को भर्ती करने से इंकार कर दिया। इसके बाद सास और पति शायरा को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचे। जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना की जानकारी सुबह पड़ोसियों को हुई। घर पर जमावड़ा लग गया।
हत्या का राज खुलने पर शानू ने खुद ही पुलिस को फोन कर पूरी वारदात बता दी। पुलिस ने शानू को मौके पर पहुंचकर गिरफ्तार कर लिया। शव को पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस के अनुसार शानू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
सात साल पहले किया था प्रेम निकाह
शानू की मां शाईन ने बताया कि बेटा ऊदला स्थित कट्टीघर में काम करता था। उसी दौरान उसको वहीं काम करने वाली शायरा से प्रेम हो गया था। इसके बाद दोनों ने प्रेम निकाह किया था। निकाह को सात साल हो गए हैं। बेटे के गुस्से ने पूरा परिवार उजाड़ दिया। बच्चों के भविष्य पर भी संकट आ गया है।
अब कौन सींचेगा मासूमों का बचपन
गुस्से के आगोश में आए शानू ने पलभर में परिवार की सारी खुशियों को तबाह कर दिया। इस तबाही का सबसे बुरा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ता दिख रहा है। शानू दो भाइयों और तीन बहनों में बड़ा था। शानू की मां के मुताबिक छोटा बेटा अलग रहता है। पति की भी मौत हो चुकी है। शानू ही एकमात्र कमाने वाला है। वह भी पत्नी की हत्या कर जेल चला गया। मासूम बच्चों के सिर से मां का साया तो सदा के लिए उठ गया। परिवार की आर्थिक स्थिति भी इतनी ठीक नहीं है। अब मासूम बच्चों की पढ़ाई तो दूर खाने-पीने के राशन के पैसों के लिए लाले हैं। बुढ़ापे में मेहनत मजदूरी का काम भी नहीं कर सकती, जिससे बच्चों को पाल सकूं।