अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की पूर्व छात्रा खुशबू मिर्जा
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जब भी भारत के चंद्रयान मिशन की सफलता की चर्चा होती है, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की पूर्व छात्रा खुशबू मिर्जा का नाम गर्व से लिया जाता है। साधारण परिवार से निकलकर अंतरिक्ष विज्ञान की ऊंचाइयों तक पहुंचीं खुशबू ने चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 मिशन का हिस्सा बनकर न सिर्फ एएमयू बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया।
अंतरराष्ट्रीय चंद्र दिवस के अवसर पर उनकी उपलब्धियां एक बार फिर प्रेरणा बनकर सामने हैं। अमरोहा की रहने वाली खुशबू मिर्जा का जीवन संघर्षों से भरा रहा। वर्ष 1985 में पिता के निधन के बाद परिवार को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और शिक्षा को अपनी ताकत बनाया। वर्ष 2006 में उन्होंने एएमयू से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की।
इसके बाद खुशबू भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से जुड़ीं। वर्ष 2008 में वह भारत के पहले चंद्र मिशन चंद्रयान-1 की टीम का हिस्सा बनीं। इस मिशन ने चंद्रमा की सतह पर पानी के संकेतों की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद वर्ष 2019 में उन्होंने चंद्रयान-2 मिशन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
एएमयू के उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक और चिलमन से चंद्रयान तक पुस्तक के लेखक डॉ. राहत अबरार ने कहा कि खुशबू मिर्जा की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह छोटे शहरों और सामान्य परिवारों की बेटियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने साबित किया कि मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। चंद्रयान मिशनों की उपलब्धियों के साथ खुशबू मिर्जा का नाम भी हमेशा याद किया जाएगा। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं।
इसलिए मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय चंद्र दिवस
हर साल 20 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय चंद्र दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य 1969 में अपोलो 11 मिशन के जरिये चंद्रमा की सतह पर नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन के पहली बार कदम रखने की ऐतिहासिक घटना का जश्न मनाना है।