सुरेंद्र दिलेर के मंत्री बनने पर खैर में मिठाई बांटते पदाधिकारी
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दिलेर परिवार की योगी से करीबी भी बड़ी वजह
स्व. किशनलाल दिलेर के सियासी रणनीतिकार रहे योगेश शर्मा बताते हैं कि इस परिवार के साथ दो बातें सबसे ज्यादा चर्चित हैं। एक तो यह कि जनसंघ के जमाने से यह परिवार संघ व भाजपा से जुड़ा है। भले ही परिवार को पार्टी में कभी स्थान मिले या न मिले, मगर पार्टी से कभी दूरी नहीं बनाई। पार्टी के प्रति हमेशा निष्ठावान रहा। दूसरा यह कि परिवार बेहद शिष्ट व सभ्य विचारधारा वाला रहा है। कभी इस परिवार की ओर से ऐसी सियासत नहीं की गई जो किसी कमी या परेशानी का कारण बने।
इसके अलावा जब स्व. किशनलाल दिलेर सांसद थे और वे दिल्ली में जिस आवास में रहते थे। मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उस समय गोरखपुर सांसद होने के कारण उनके पड़ोसी थे और दोनों में अच्छे रिश्ते थे। उन रिश्तों को स्व. किशनलाल दिलेर के बाद उनके पुत्र राजवीर सिंह ने निभाया और अब पौत्र सुरेंद्र दिलेर निभा रहे हैं। जब खैर उपचुनाव में टिकट देने की बात आई तो खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिलेर परिवार में टिकट देने की वकालत की थी। उसी का परिणाम रहा कि खुद मुख्यमंत्री ने खैर में कई सभाएं कीं और सुरेंद्र दिलेर चुनाव जीते।
कड़े मुकाबले में रही 38 हजार की जीत
खैर सीट पर एक तरफ भाजपा से वाल्मीकि समाज से सुरेंद्र दिलेर मैदान में थे, जबकि उनके सामने सपा ने जाट परिवार की अनुसूचित जाति की बहू चारू केन को उतारा था। इसके चलते जाटलैंड में मुकाबला बेहद कड़ा हुआ था। जिले के कई दिग्गज नेताओं को खुद मुख्यमंत्री ने यह जिम्मेदारी दी थी कि वे ऐसे चुनाव लड़ाएंगे, जैसे खुद लड़ रहे हों। हर हाल में खैर सीट वापस जीतनी है और परिणाम वही आया। सुरेंद्र 38 हजार से जीते थे।
पीडीए की काट करने की तैयारी में भाजपा
सुरेंद्र दिलेर को मंत्री मंडल में स्थान देकर पश्चिमी यूपी के वाल्मीकि समाज के साथ-साथ अनुसूचित वर्ग में भी काम करने का जिम्मा दिया जाएगा। आने वाले 2027 के चुनाव में सुरेंद्र दिलेर पर अपनी सीट के साथ-साथ पश्चिमी यूपी की अन्य सीटों पर भी पार्टी संगठन के लिए काम करने की बड़ी जिम्मेदारी आएगी।
दादा किशनलाल दिलेर का सियासी सफर
- 1967 से 93 तक जिले की एससी आरक्षित कोल सीट से जनसंघ व भाजपा से पांच बार विधायक
- 1996 से 2004 तक अनुसूचित आरक्षित हाथरस लोकसभा सीट पर चार बार सांसद निर्वाचित हुए
- जनसंघ व भाजपा में जिला उपाध्यक्ष से प्रदेश उपाध्यक्ष व राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य तक चुने गए
- 2008 में सांसद रहते उनका देहांत हुआ, उनके बाद उनके पुत्र राजवीर दिलेर ने विरासत संभाली थी
पिता राजवीर दिलेर का सियासी सफर
- 2000-05 तक जवां ब्लाक से जिला पंचायत सदस्य रहे। पिता के देहांत के बाद हाथरस में सक्रिय
- 2017 में भाजपा से इगलास आरक्षित सीट पर जनपद में सर्वाधिक मतों से विधायक निर्वाचित हुए
- 2019 में भाजपा से पिता की विरासत वाली सीट हाथरस पर रिकार्ड मतों से सांसद भी निर्वाचित हुए
- 2024 में चुनाव से ऐन पहले हृदयाघात से उनका देहांत हुआ। इसके बाद बेटे सुरेंद्र ने विरासत संभाली