एलपीजी आपूर्ति में वैश्विक स्तर पर आ रही बाधाओं और चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में मिट्टी के तेल (केरोसिन) के भंडारण को फिर से शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। इसी क्रम में जिले में पिछले छह वर्षों से बंद पड़े डिपो को पुनः संचालित करने की कवायद शुरू हो गई है।
जिले के दो डिपो संचालकों ने फिर से भंडारण के लिए अपनी सहमति दे दी है। इनमें से एक डिपो शहर क्षेत्र में और दूसरा खैर तहसील में स्थित है। इन दोनों डिपो की कुल भंडारण क्षमता 20 हजार किलोलीटर है। जिला पूर्ति विभाग ने इन परिसरों की वर्तमान स्थिति और तकनीकी पहलुओं की जांच की है, ताकि आपात स्थिति में यहां ईंधन का सुरक्षित भंडारण किया जा सके।
जिले में पिछले छह वर्षों से बंद पड़े मिट्टी के तेल (केरोसिन) के डिपो की जानकारी जुटाई गई। शासन स्तर से हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में केरोसिन भंडारण की संभावनाओं पर काम शुरू कर दिया है।
विभाग के मुताबिक करीब छह साल पहले तक जिले में 12 मिट्टी के तेल के डिपो सक्रिय थे, जिनके माध्यम से 1350 राशन दुकानों तक तेल पहुंचता था। जिले में दो डिपो दो आगरा रोड पर, एक शाहकमाल रोड पर था। ग्रामीण क्षेत्र में आसना, अतरौली, खैर, इगलास, गोंडा, टप्पल आदि क्षेत्रों में थे।
शासन के निर्देश पर जिले के पुराने डिपो की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई है। कई संचालकों से वार्ता के बाद दो-तीन डिपो फिर से संचालन के लिए तैयार हैं। यह कदम भविष्य में गैस आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है।
-सत्यवीर सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी