हरदुआगंज तापीय परियोजना (कासिमपुर पावर हाउस) परिसर के आसपास के कबाड़ी पिछले कुछ समय में लखपति हो गए हैं। चर्चा तो ये भी है कि कुछ करोड़पति तक हो गए हैं।
परियोजना परिसर में 620 मेगावाट की नई निर्माणाधीन यूनिट के चलते पुराने ढांचे को धराशायी किया गया। इसका कबाड़ा धीरे-धीरे चोरी हो रहा है। निर्माण करने वाली एजेंसी ने कई बार रिपोर्ट दर्ज करायी लेकिन चोरी रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। सामाजिक सरोकारों के लिए काम करने वाली संस्था नागरिक चेतना समिति के सचिव ठा. आनंद पाल सिंह की ओर से प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि समाजवादी पार्टी की सरकार के समय हरदुआगंज तापीय परियोजना परिसर में 620 मेगावाट क्षमता की नई यूनिट के बनने का शिलान्यास हुआ था।
इसके निर्माण की जिम्मेदारी तोशीबा कंपनी को दी गई है। नई यूनिट जहां पर बन रही है, वहां पर कुछ पुराना कंस्ट्रक्शन भी था जिसे डिसमेंटल कर दिया गया। पत्र में कहा गया है कि पहले यहां पर बाहर की सुरक्षा एजेंसी के गार्ड सुरक्षा कर रहे थे, जिससे स्थानीय लोगों की आवाजाही पूरी तरह बंद थी।
उस सुरक्षा एजेंसी के गार्डों का वेतन अधिक था। बाद में उस सुरक्षा एजेंसी के गार्ड हटा दिए और स्थानीय स्तर पर लोगों को भर्ती कर लिया। स्थानीय स्तर पर भर्ती कुछ लोगों ने अपने परिचितों को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और यहीं से स्क्रैप की चोरी की घटनाएं बढ़ने लगीं।
स्थिति यह हो गई है कि कस्बे और आसपास के कुछ गांवों के कबाड़ी जो पिछले कुछ समय तक बेहद साधारण स्थिति में थे, अब बेहद मजबूत आर्थिक स्थिति में आ गए हैं। उनके आर्थिक स्तर में अचानक आए बदलाव को परियोजना परिसर में स्क्रैप की चोरी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि परियोजना निर्माण से जुड़े लोग ऐसी बात से इनकार ही करते आए हैं।
‘स्क्रैप की चोरी होने की बात सही नहीं है। यहां पूरी सर्चिंग रहती है। जहां तक सुरक्षा एजेंसी के गार्डों की जगह स्थानीय लोगों की भर्ती का मामला है तो यह मेरा क्षेत्र नहीं है। मुझे इसकी जानकारी भी नहीं है। हमारे यहां पर पूरी सुरक्षा है। परिसर में रात को गश्त आदि भी रहती है’।
- ए गांगुली, महाप्रबंधक (सिविल), नई यूनिट निर्माण एजेंसी