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बाजार में उमड़ी भीड़, सुहागिनों ने की जमकर खरीदारी

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रेलवे रोड़ मार्केट में चूड़ियां पसंद करतीx महिला। - फोटो : CITY OFFICE
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सोमवार को बाजारों में खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। करवाचौथ की तैयारियों को लेकर सुहागिनों ने जमकर खरीदारी की। रेलवे रोड, मीना बाजार, तांगा स्टैंड, रामघाट रोड, सेंटर प्वाइंट, जीटी रोड व आगरा रोड पर स्थित दुकानों पर ग्राहकों की काफी भीड़ रही।
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खरीदारी करने के लिए महिलाओं के साथ उनके पति भी आए। साड़ी, चूड़ियां, करवे, कलेंडर, कॉस्मेटिक की दुकानों पर जमकर खरीदारी हुई। रेलवे रोड, रामघाट रोड, जीटी रोड, आगरा रोड, अमीरनिशां बाजार काफी व्यस्त रहा। सर्वाधिक भीड़ रेलवे रोड और इससे जुड़े बाजारों में रही। कपड़ों में हल्के लांचे, रेडी टू वीयर साड़ी, सिल्क की साड़ियों की खूब बिक्री हुई। फिरोजाबादी चूड़ी, लाख की चूड़ियां और चूड़े की अधिक मांग रही। गिफ्ट गैलरियों से पतियों ने ग्रीटिंग कार्ड, कपल स्टैचू, गुलदस्ते, चॉकलेट, ड्राई फ्रूट खरीदे। ब्यूटी पार्लरों में भी महिलाएं फेसियल, थ्रेडिंग, वैक्सीन, ब्लीच, हेयर कटिंग के लिए पहुंची।
सड़क किनारे चढ़ा मेहंदी का रंग
रामघाट रोड, सेंटर प्वाइंट, रेलवे रोड, आगरा रोड, जीटी रोड पर जगह जगह सड़क किनारे मेहंदी लगाने के लिए लोगों ने अपनी दुकानें लगा ली हैं। बाजार आने जाने वाली कई महिलाओं ने यहां बैठकर अपने हाथों में मेहंदी लगवाई। दोनों हाथों में मेहंदी लगाने के लिए लोगों ने 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक खर्च किए।
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करवाचौथ पर 06.37 से लेकर सवा आठ बजे तक रहेगा पूजा का मुहूर्त
अलीगढ़। श्री गुरू ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करक चतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। व्रत रखकर महिलाएं शाम को पूजा करती हैं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलती हैं। फिर परिवार साथ बैठकर भोजन करता है। बुधवार शाम 06: 37 से लेकर आठ बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त है। जबकि करवा पूजन 17: 29 से 18: 44 तक कर सकते हैं। रात आठ बजकर 15 मिनट पर चंद्रोदय का अनुमान है।



करवा चौथ की यह है पूजा विधि
करवाचौथ के दिन व्रत में शिव-पार्वती, कार्तिकेय, गजानन और चांद का पूजन किया जाता है। पूजा के लिए एक पाटा धोकर शुद्ध करें। इस पर कुछ गेहूं के दाने रखें। अब इस पर पूजा के लिए चौथ माता का चित्र रखें। एक मिट्टी के करवे पर कलावा बांधकर रोली से स्वस्तिक बनाएं। उस पर रोली से तेरह बिंदी लगाकर चांद को अर्घ्य देने के लिए जल भर दें। उस पर एक खाली दीपक या प्लेट रखकर फल-फूल रखें। दूसरी प्लेट में रोली, कलावा, गेहूं के दाने, गु?, मेहंदी लें। एक लोटा जल से भरकर रखें। लोटे पर कलावा बांधकर स्वस्तिक बनाएं। चौथ माता को रोली, मोली, अक्षत, फूल, मेहंदी आदि अर्पित करके पूजा करें और भोग लगाएं। अपने माथे पर रोली से टीका करें। हाथ में गेहूं के तेरह दाने लेकर करवा चौथ की कहानी सुनें। श्री गणेश भगवान की कहानी सुनें। कहानी सुनने के बाद गेहूं के कुछ दाने लोटे में डाल दें। कुछ दाने सा?ी के पल्लू में बांध लें। पल्लू में बंधे हुए गेहूं के दाने रात में चांद को अर्घ्य देते समय हाथ में रखते हैं। लोटे का जल सूरज को देते है। एक थाली में फल और मिठाई आदि रखते हैं। शक्कर के करवे में चावल भरते हैं। इसी थाली में रखते हैं। कुछ रूपये रखकर इसे बायना के तौर पर सास, ननद या जेठानी को देते हैं। इनके न होने पर सम्मानित महिला को बायना देते हैं।
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