गंगा घाट से आगरा तक पैदल चलने में 24 घंटे का समय लगता था। स्केट जूते पहनने से यह दूरी 10 से 12 घंटे में पूरी हो जाएगी। जहां सड़क खराब होती है, वहां वह पैदल चलते हैं। सड़क ठीक होने पर वह स्केटिंग कर अपनी यात्रा फिर से शुरू कर देते हैं।
लंबी दूरी की कांवड़ यात्रा की थकान मिटाने और समय बचाने के लिए कांवरियों ने एक अनूठा तरीका अपनाया है। 16 अगस्त को सिकंदराराऊ से आगरा की ओर जा रहे कांवड़िया पैरों में स्केट जूते पहनकर कांवड़ ले जाते दिखे। आगरा निवासी प्रशांत शर्मा ने यह तरीका अपने दिमाग में सोचा था।
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कांवड़िया प्रशांत शर्मा ने बताया कि उन्होंने काफी समय पहले से स्केटिंग करने की तैयारी की थी। जब वह स्केटिंग में निपुण हो गए, तब उन्होंने यह निश्चय किया। उन्होंने सोरों के गंगा घाट से स्केट पर कांवड़ लेकर गंतव्य तक पहुंचने का फैसला किया। उनका लक्ष्य भगवान शिव का जलाभिषेक करना है। प्रशांत के अनुसार, गंगा घाट से आगरा तक पैदल चलने में 24 घंटे का समय लगता था। स्केट जूते पहनने से यह दूरी 10 से 12 घंटे में पूरी हो जाएगी। जहां सड़क खराब होती है, वहां वह पैदल चलते हैं। सड़क ठीक होने पर वह स्केटिंग कर अपनी यात्रा फिर से शुरू कर देते हैं। उनके समूह में कुल 12 कांवरिया शामिल हैं। इस समूह में महिलाएं भी यात्रा कर रही हैं।
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स्केटिंग से यात्रा का अनुभव
प्रशांत ने बताया कि यह विचार उन्हें लंबी यात्रा की थकान से बचने के लिए आया था। उन्होंने अपनी स्केटिंग क्षमता को परखा और फिर इस योजना को अंजाम दिया। स्केटिंग के कारण यात्रा की गति काफी बढ़ जाती है। इससे उन्हें अपने गंतव्य तक जल्दी पहुंचने में मदद मिलती है। यह तरीका कांवड़ियों के लिए एक नया और प्रभावी विकल्प साबित हो रहा है।
समूह और यात्रा का मार्ग
प्रशांत शर्मा के साथ 12 कांवड़ियों का एक समूह यात्रा कर रहा है। इस समूह में पुरुष कांवड़ियों के साथ महिलाएं भी शामिल हैं। वे सभी मिलकर गंगा घाट सोरों से आगरा तक की यात्रा कर रहे हैं। खराब सड़कों पर पैदल चलकर और अच्छी सड़कों पर स्केटिंग करके वे आगे बढ़ रहे हैं। यह अनूठा तरीका उनकी यात्रा को सुगम और कम समय में पूरा करने में सहायक है।