वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में तो कल्याण सिंह खुद तत्कालीन प्रत्याशी राजेश दिवाकर का नामांकन कराने यहां आए थे। यही स्थिति विधानसभा चुनावों में रही। कल्याण सिंह का महत्व इस जिले की राजनीति में बरकरार रहा। कल्याण सिंह से यहां के पुराने भाजपा नेताओं का काफी गहरा नाता रहा है।
यहां पार्टी को मजबूत बनाने में कल्याण सिंह का अहम योगदान रहा। जिले के ज्यादातर सभी पुराने भाजपाइयों को कल्याण सिंह चेहरे और नाम से जानते थे। शनिवार की देर रात जैसे ही कल्याण सिंह के निधन की सूचना यहां के भाजपाइयों को मिली तो उनमें शोक की लहर दौड़ गई।
मुख्यमंत्री बने तो बदल दिया था जिले का नाम
तीन मई 1997 को हाथरस जिला बना, तब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं और प्रदेश सरकार भाजपा व बसपा के गठजोड़ से बनी थी। पुराने जानकारों की मानें तो तब कल्याण सिंह अतरौली को जिला बनाना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने हाथरस को जिला बना दिया और इसका नाम महामाया नगर रखा। हालांकि इसके कुछ दिन बाद ही कल्याण सिंह सत्ता में आ गए, लेकिन उन्होंने जिला समाप्त नहीं किया, अलबत्ता इसका नाम बदलकर हाथरस कर दिया।
जब बागला अस्पताल में कल्याण सिंह ने मारा था छापा
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जिक्र आते ही पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रमेशचंद्र आर्य की पुरानी यादें ताजा हो गईं। आर्य का कहना है कि कल्याण सिंह अक्सर उनके घर पर आते थे। वर्ष 1978 में जब कल्याण सिंह स्वास्थ्य मंत्री थे तो उन्होंने बागला अस्पताल में छापा मारा था। एक-एक गोली वहां देखी थी और एक्सपायरी डेट की दवा अपने सामने नष्ट कराई थी। कल्याण सिंह करीब चार घंटे तक अस्पताल में मौजूद रहे थे।