राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने कालीचरण सिंह एडवोकेट जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कालीचरण सिंह की पत्नी वार्ड नंबर-31 की जिला पंचायत सदस्य ने दावेदारी ठोंकी थी। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व के आदेश पर उन्हें सपा-रालोद की प्रत्याशी अर्चना यादव को समर्थन देना पड़ा था। सियासी गलियारों में उनकी कुर्बानी के चलते पार्टी की तरफ से उनके पति को जिलाध्यक्ष पद का इनाम में मिलने की चर्चा है।
पार्टी के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष कालीचरण सिंह ने बताया कि पिछले 12-15 साल से वह पार्टी से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में किसानों के नेता चौधरी चरण सिंह से काफी प्रभावित था। वर्ष 1977 में चौधरी चरण सिंह, मोराजी देसाई, अटल बिहारी बाजपेई अलीगढ़ के कंपनी बाग में जनसभा करने आए थे। इन सियासी दिग्गज नेताओं को सुनने भी गया था। उसके बाद चौधरी चरण सिंह की नीतियों से प्रभावित हो गया।
कालीचरण ने कहा कि एक बार वह हस्तपुर चंदफरी के सहकारी समिति लिमिटेड के निर्विरोध अध्यक्ष भी चुने जा चुके हैं। जिलाध्यक्ष की कुर्सी पिछले छह महीने से खाली थी। कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में पूर्व जिलाध्यक्ष रामबहादुर सिंह कार्य कर रहे थे। जिलाध्यक्ष की कुर्सी इनाम में मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह तो शीर्ष नेतृत्व ही बता सकता है। कालीचरण सिंह ने कहा कि जल्द ही जिला कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी। महंगाई के विरोध में सड़कों पर उतरेेंगे।