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Aligarh: अनुमति के बाद धूमधाम से निकली काली शोभायात्रा, देखने को मिला श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम

Fri, 27 Mar 2026 11:04 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

शोभायात्रा में मां अंबे के जयकारों से वातावरण गूंज उठा और हर ओर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्ति में लीन श्रद्धालु नृत्य करते हुए यात्रा के साथ आगे बढ़ते रहे। काली के आकर्षक करतबों ने युवाओं में जोश भर दिया, वहीं डीजे बैंडबाजों पर बज रहे भजनों की धुन पर महिलाएं भक्ति में सराबोर दिखीं।
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कलश यात्रा, अब्दुल करीम चौराहे पर खेलती काली - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ में देहलीगेट के कनवरीगंज स्थित दुर्गा महारानी मंदिर से निकलने वाली शोभायात्रा की अनुमति को लेकर संशय के बादल हटते ही 27 मार्च को भक्ति का रंग पूरे शहर पर छा गया। प्रशासन ने परंपरागत तरीके से अब्दुल करीम चाैराहे से निकलने वाली कलश यात्रा व एक डोले को ही शामिल होने की अनुमति दी थी। 

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हालांकि काली व जगन्नाथजी की झांकियों को कटरा मोड़ से ही पुलिस ने बैरियर लगाकर रोक दिया। हल्का सा विरोध भी हुआ लेकिन आयोजकों की समझ-बूझ से मामला शांत हो गया। इन झांकियों को दूसरे मार्ग से निकाला गया। पुराने शहर से निकली कलश यात्रा व मां दुर्गा की भव्य शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर नजर आया। कलश यात्रा के दौरान श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सिर पर कलश धारण किए महिलाओं और युवतियों की लंबी कतारें भक्ति भाव से सराबोर नजर आईं। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। जगह-जगह भव्य स्वागत द्वार सजाए गए और भक्तों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई। 
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मां अंबे के जयकारों से वातावरण गूंज उठा और हर ओर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्ति में लीन श्रद्धालु नृत्य करते हुए यात्रा के साथ आगे बढ़ते रहे। काली के आकर्षक करतबों ने युवाओं में जोश भर दिया, वहीं डीजे बैंडबाजों पर बज रहे भजनों की धुन पर महिलाएं भक्ति में सराबोर दिखीं। इसमें खाटू श्याम, जगन्नाथ, भोलेनाथ, ठाकुरजी महाराज, काली, दुर्गा समेत 20 से अधिक सुंदर झांकियां, 10 से अधिक कालीजी की शोभायात्रा, 15 बैंड व डीजे के अलावा ढोल नगाड़े शामिल थे। 

शोभायात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत हुआ और भक्तों ने काली का पूजन किया। भक्तजन बैंडबाजों एवं ढ़ोल की थाप पर झूमते हुए चल रहे थे। माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ और भक्ति का उत्साह हर किसी पर भारी नजर आया। यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस- प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। भारी मात्रा में आरएएफ, पीएसी के अलावा कई थानों का फोर्स तैनात रहा।  

यूपी में फिर से हम भगवा लहराएंगे
शोभायात्रा के अब्दुल करीम चाैराहे पर पहुंचने से पूर्व ही सब्जी मंडी व ऊपरकोट को जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग के साथ भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। इस दाैरान वहां जय श्रीराम के नारों के साथ ही पूर्व मेयर शकुंतला भारती ने यूपी में फिर से हम भगवा लहराएंगे ...गीत सुनाया तो श्रद्धालु झूमने लगे। इसके बाद यात्रा महावीरगंज की ओर बढ़ी तो सबने राहत की सांस ली। यहां आरएसएस के सह विभाग संघचालक ललित, रतन कुमार, अध्यक्ष अखिल मांगलिक, मंत्री अरुण कुमार, कोषाध्यक्ष निर्मल कुमार, उपाध्यक्ष अखिलेश चंद्र वार्ष्णेय, ललित मोहन, संजय गोयल आदि मौजूद रहे।

पिछली बार के विवाद को लेकर नए रास्ते से मांगी थी अनुमति
दुर्गा मंदिर से निकलने वाली शोभायात्रा को लेकर बीते साल कटरा की जगह अब्दुल करीम चाैराहा व सब्जीमंडी से निकालने को लेकर विवाद हुआ था। इसी मामले में पुलिस ने आयोजन समिति की संरक्षक शकुंतला भारती, अध्यक्ष अखिल मांगलिक समेत तीन आयोजकों पर रिपोर्ट दर्ज की थी। इसी घटना को लेकर इस बार श्री दुर्गा महारानी मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने शोभायात्रा का मार्ग बदले जाने की अनुमति प्रशासन से मांगी थी।

महावीरगंज व देहलीगेट से शामिल हुईं झांकियां
कनवरीगंज स्थित मां दुर्गे महारानी मंदिर सेवा समिति के तत्वावधान में दो अलग- अलग स्थानों से झांकियां निकाली गईं। इसमें पहली मुख्य शोभायात्रा कनवरीगंज से अब्दुल करीम चाैराहा, महावीरगंज, बारहद्वारी होते हुए। जबकि दूसरी शोभायात्रा पथवारी देवी मंदिर नगला मसानी से प्रारंभ होकर देहलीगेट चौराहा, कनवरीगंज, पत्थर बाजार, होते हुए कंपनी बाग पर मां दुर्गा मंदिर पर पहुंच कर संपन्न हुई।

अनुमति के विवाद ने छीन ली शोभायात्रा की भव्यता
वर्षों से दुर्गा महारानी मंदिर से शोभायात्रा निकलती रही है, कभी कोई विवाद नहीं हुआ। पिछले साल से ही प्रशासन ने इस पर सख्ती करनी शुरू कर दी है। इससे शोभायात्रा व मेले का स्वरूप ही बदल गया है।- रतन सिंह
देश में नरेंद्र मोदी व प्रदेश में योगी जी सत्ता में बैठे हैं। खुद को 56 इंच की सीना वाले बताते हैं, इसके बाद भी ऐसा काैन सा डर है कि हिंदुओं को शोभायात्रा निकालने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।- अशोक कुमार
पहले शोभायात्रा में 50-60 डोले व 20 काली शामिल रहती थीं। शहर की सड़कें मेले को देखने के लिए जुट जाती थीं, इस बार झांकियां कम थीं। पहले की तरह उत्साह भी कम दिखाई दिया।- लक्ष्मी देवी
हमने तो इस साल शोभायात्रा निकलने की उम्मीद ही छोड़ दी थी । ऐनवक्त पर अनुमति मिली तो शोभायात्रा की तैयारियां ठीक से नहीं हो सकीं। इसके बाद भी शोभायात्रा निकली तो काफी अच्छा लगा।- माधुरी वार्ष्णेय

महिलाओं ने भी काली संग की तलवारबाजी
शोभायात्रा में शामिल काली के स्वरूप के साथ महिलाओं ने भी तलवारबाजी दिखाकर अपने हुनर का प्रदर्शन किया। महिलाएं पूरे समय तक शोभायात्रा में उत्साहित नजर आईं। बीच - बीच में जयकारे लगाती रहीं तो भजनों पर झूमती व थिरकती नजर आईं।

आगे भी ऐसे ही निकलेगी मां काली शोभायात्रा
अलीगढ़ के देहलीगेट चौराहे से निकाली जाने वाली मां काली शोभायात्रा व डोला के मार्ग को लेकर पिछले दो वर्ष से उपजे विवाद को बृहस्पतिवार रात विराम लगा दिया गया। हल निकाला गया है कि आगामी वर्ष में भी यह शोभायात्रा इसी तरह निकाली जाएगी। मगर उसके लिए आयोजकों द्वारा पहले 54 वर्ष पुराने परंपरागत मार्ग को लेकर अनुमति मांगी जाएगी। जिस पर एक समिति की संस्तुति के आधार पर शोभायात्रा निकाली जाएगी।

इस शोभायात्रा के मार्ग को लेकर पिछले वर्ष विवाद शुरू हुआ। बिना अनुमति जबरन शोभायात्रा निकालने पर आयोजकों पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इस बार अनुमति न मिलने पर विवाद शुरू हुआ। हंगामा, विरोध व विवाद के बीच बृहस्पतिवार शाम यह विषय भाजपा संगठन के पूर्व व वर्तमान पदाधिकारियों के साथ-साथ संघ के बड़े पदाधिकारियों तक पहुंचा। इसके बाद संघ के बड़े पदाधिकारियों के साथ-साथ जिले के प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय अधिकारियों से लेकर शासन के अधिकारियों तक से वार्ता की। जिसमें मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव से वार्ता हुई। उनके समक्ष पूरा विषय रखा गया। जिसमें इस बात पर सहमति बनी कि इस बार शोभायात्रा का सिर्फ मुख्य डोला 54 वर्ष पुराने मार्ग से निकाल लिया जाए। आगामी वर्ष में इसे 100 वर्ष पुराने परंपरागत मार्ग से निकालने के लिए मार्ग परिवर्तन पर पहले से होमवर्क कर लिया जाए। इस मामले में शासन को संज्ञान में लेकर मार्ग परिवर्तन पर निर्णय लेकर शोभायात्रा निकलवाई जाए। इसके बाद रात में इस फैसले पर अंतिम मोहर लगी।
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विवाद एक नजर में
-100 वर्ष से पुराना है मां काली शोभायात्रा का यह आयोजन
-54 वर्ष पहले 1972 में दंगों के बाद मार्ग परिवर्तित किया था
-1978 से शोभायात्रा कटरा मार्ग से होकर निकाली जाने लगी
-53 वर्ष बाद 2025 में फिर पुराने मार्ग पर निकालने से विवाद
-2026 में इस विवाद को 54 वर्ष बाद दे दिया गया है विराम

इसलिए बदले थे शहर में ऐसे धार्मिक आयोजनों के मार्ग
पुलिस रिकार्ड व पुराने जानकारों के अनुसार वर्ष 1972 में लोकसभा चुनाव के दौरान पुराने शहर में सांप्रदायिक दंगा हुआ था। उस समय कर्फ्यू के चलते देहली गेट से निकलकर कनवरीगंज से सब्जी मंडी के रास्ते शहर में निकाली जाने वाली इस शोभायात्रा सहित उस समय के अन्य सभी आयोजनों पर रोक लगाई गई। बाद में शोभायात्रा को स्थानीय प्रशासन ने कटरा में होकर निकलवाना शुरू कर दिया। इसके बाद 1978 में भूरा पहलवान हत्याकांड के बाद लंबे समय तक शहर दंगों व कर्फ्यू के चपेट में रहा। तब शासन ने जस्टिस माथुर आयोग का गठन कर शहर के सुरक्षा प्रबंधन पर रिपोर्ट तैयार कराई। उस रिपोर्ट में शहर में 9 स्थानों पर स्थायी रूप से पीएसी तैनाती के साथ-साथ इस शोभायात्रा के अलावा जयगंज की रंगभरनी एकादशी की शोभायात्रा सहित अलम-ताजियों के मार्ग परिवर्तित करने की सिफारिश थी। उसी को शासन ने कानून व्यवस्था के मद्देनजर लागू कर व्यवस्था सुचारू कराई थी।
शोभायात्रा इस बार सकुशल निकाली गई है। डोला को परिवर्तित मार्ग से निकलवाया गया है। बाकी आगामी वर्ष के लिए मार्ग परिवर्तन पर अनुमति के समय एक समिति के जरिये रिपोर्ट तैयार कराई जाएगी। उसके आधार पर शोभायात्रा सभी व्यवस्थाएं मुकम्मल कर निकलवाई जाएगी।-संजीव रंजन, डीएम
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