विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के हर गांव में उपलब्ध संसाधनों का पूरा ब्योरा मिलने से यह तय करना आसान होगा कि किस क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर कितना है और उसे कम करने के लिए किन उपायों की जरूरत है। इससे गांव-वार रणनीति बनाकर कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य हासिल करने में तेजी आएगी।
अलीगढ़ जिले की बात करें तो यहां 852 में से अब तक एक भी ग्राम पंचायत प्रदूषण मुक्त नहीं हो पाई है। हालांकि दो पंचायत सिकंदरपुर माछुआ और भरतपुर पंचायत शुरूआती सर्वे में आगे चल रही है। साल 2030 तक प्रदेश सरकार को 45 फीसदी पंचायतों को कार्बन न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य मिला है।
नई जनगणना से गांवों में इस्तेमाल हो रहे संसाधनों की सटीक जानकारी मिलेगी। इससे कार्बन न्यूट्रल गांवों की नीति बनाने और उसे लागू करने में आसानी होगी। - यतेंद्र कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी, अलीगढ़
सवाल खोलेंगे प्रदूषण का सच
जनगणना में हर परिवार से करीब 33 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें घर में मौजूद साइकिल, स्कूटर, कार और अन्य वाहनों की संख्या, बिजली कनेक्शन, खाना पकाने के ईंधन (एलपीजी, लकड़ी, कोयला) और पेयजल स्रोत की जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा सौर ऊर्जा उपकरण, जेनरेटर, इंजन और ई-वाहनों का भी ब्योरा लिया जाएगा। इन आंकड़ों के आधार पर हर गांव के कार्बन उत्सर्जन का अनुमान लगाया जा सकेगा और उसी अनुसार प्रदूषण कम करने की योजना तैयार की जाएगी।