राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी में बृहस्पतिवार को कोहिनूर मंच पर गायक कैलाश खेर के आवाज और अंदाज ने समा बांध दिया। वहीं, अपने पसंदीदा गायक को देखने और सुनने आई जबरदस्त भीड़ के चलते कोहिनूर मंच के बाहर अधिकारियों-पुलिस और भीड़ के बीच जबरदस्त टकराव जैसी स्थिति रही। भीड़ ने एक अफसर और नेताओं तक से अभद्रता कर दी।
कार्यक्रम के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई बार पुलिस ने लाठी फटकारी। खींचतान में कई पुलिसकर्मियों की वर्दी के बटन टूट गए। पंडाल के अंदर भी एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक में कुर्सियां फेंकी गईं। इसमें कई लोग चोटिल हो गए। लेकिन इन सब बातों से परे पंडाल के अंदर कैलाश खेर को सुनने और देखने आए दर्शक देर रात तक उनकी आवाज और अंदाज का आनंद लेते रहे।
कार्यक्रम का उद्घाटन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर, सांसद सतीश गौतम, कमिश्नर गौरव दयाल, जिलाधिकारी चंद्र भूषण सिंह, एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपानी ने संयुक्त रूप से किया। इसके बाद मंच पर कैलाश खैर के सूफियाना कलामों का जादू छा गया। सबसे पहले कैलाश खैर ने माशा अल्लाह, माशा अल्लाह प्रस्तुत कर के पंडाल में मौजूद भीड़ को अपने साथ झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद तेरे बिन दिल नहीं लगदा मेरे सोनिया, तौबा तौबा, लुट गई मैं, मर गई मैं, हो गई मैं तेरी दीवानी, टूटा टूटा एक परिंदा ऐसे टूटा जैसे एक के बाद एक सूफियाना कलाम प्रस्तुत करके पंडाल में अपनी आवाज का जादू बिखेर दिया, जिसमें दर्शक बंध गए।
ये भी हुआ पंडाल के अंदर-बाहर
कार्यक्रम के दौरान अंदर जब पंडाल पूरी तरह दर्शकों से भर गया तो अंदर घुसने का प्रयास कर रहे लोगों पर पुलिस को कई बार लाठी फटकारनी पड़ी। इसमें दो-तीन लोगों के घायल होने की सूचना है। इसके अलावा पंडाल के अंदर अलग-अलग ब्लॉक में डाली गई कुर्सियां दर्शकों द्वारा फेंकी जाने लगीं। खुद प्रशासनिक अधिकारियों को व्यवस्था के लिए आगे आना पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश पर पुलिस की एक टुकड़ी को सामान्य दर्शक दीर्घा में बनाई गई गैलरी में भेजना पड़ा। वहां पर पुलिस ने लाठियां फटकार कर भीड़ को किसी तरह नियंत्रण में किया।
तालों की धरती अब तालियों के लिए जानी जाएगी
बृहस्पतिवार को रात 9:40 पर कोहिनूर मंच पर आए कैलाश खेर ने सबसे पहले अलीगढ़ की धरती को प्रणाम किया। इसके बाद कैलाश खेर ने कहा कि अलीगढ़ अब तक तालों का शहर है। लेकिन आज के बाद तालियों के शहर के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ संस्कृति, साहित्य और सभ्यता का गढ़ है। यहां की धरती से एक से एक बड़े कलाकार पैदा हुए हैं, जिन्होंने देश और दुनिया में कला का नाम रोशन किया है। ऐसी पावन धरती को वह बार-बार नमन करते हैं।
पड़ोसी को भेज रहे हैं महामारी की दवाएं
अलीगढ़। मंच पर प्रस्तुति के दौरान कैलाश कोरोना महामारी का जिक्र करना नहीं भूले। उन्होंने कहा कि महामारी के बाद यह पहला मौका है जब अलीगढ़ में बड़ा आयोजन हो रहा है। हमारा देश बहुत महान है। अब तो पड़ोसी देशों को भी महामारी की दवाएं भेजी जा रही हैं। यह हमारी सभ्यता है कि हम पड़ोसी का भी बहुत ध्यान रखते हैं। चाहे वह जैसा भी हो।
मंच से इंडियन प्रीमियर म्यूजिक लीग के लिए वोट मांगे
अलीगढ़ । कोहिनूर मंच से कैलाश खैर ने कहा कि आने वाले कुछ दिनों में टेलीविजन पर इंडियन प्रीमियर म्यूजिक लीग शुरू हो रहा है। उसमें वह भी दिखाई देंगे। इसलिए अलीगढ़ वाले इस शो के लिए अधिक से अधिक वोट करें। यह अलीगढ़ की उन से सच्ची मोहब्बत होगी।