डॉ. कफील
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नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में एएमयू में भड़काऊ भाषण देने के बाद रासुका में निरुद्ध किए गए मथुरा जेल में बंद डॉ. कफील ने जिला प्रशासन को जवाब देने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिवक्ता के जरिए वह जवाब तैयार करा रहे हैं। अधिवक्ता के अनुसार कफील का कहना है कि 15 दिसंबर का बवाल उनकी वजह से नहीं हुआ, उन्हें बेवजह इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उस दिन जामिया यूनिवर्सिटी दिल्ली में हुई घटना के विरोध में एएमयू सहित देश के कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में विरोध हुआ था। वह जामिया की घटना का रिएक्शन था, उसे उनके माथे गलत मढ़ा जा रहा है। अभी जवाब तैयार किया जा रहा है। निर्धारित समय अवधि में जवाब दाखिल कर दिया जाएगा।
डॉ. कफील के अधिवक्ता इरफान गाजी के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट द्वारा कफील को रासुका में पाबंद करते हुए 12 दिन में जवाब दाखिल करने को कहा है। इस नोटिस का अध्ययन किया जा रहा है और बिंदुवार जवाब तैयार किया जा रहा है। अब तक जो बात समझ में आई है, उसके अनुसार प्रशासन का मानना है कि 12 दिसंबर को एएमयू में कफील के भाषण के बाद 13 दिसंबर को 10 हजार छात्र एकत्रित हुए और फिर 15 को हिसंक हुए। वहीं उसके बाद से धरना भी अनवरत जारी है।
अधिवक्ता के अनुसार इस मामले में कफील का कहना है कि एएमयू में 9 दिसंबर से ही विरोध व धरना शुरू हो गया था। वह तो 12 को आए थे। न उन्होंने ऐसा कोई बयान दिया, जिससे छात्र भड़के हों। विरोध के क्रम में ही 13 को जुमे के चलते छात्र एकत्रित हुए। 15 को जामिया की घटना का रिएक्शन हुआ। ऐसे में नागरिकता संशोधन कानून व सीएए के विरोध में एएमयू व अलीगढ़ शहर में अब तक हुए पूरे घटनाक्रम के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना गलत है। इरफान गाजी के अनुसार जल्द जवाब दाखिल किया जाएगा।