सुबह से दोपहर बाद तक दनादन बिकने वाली कचौड़ी ने वाणिज्य कर विभाग की नींद उड़ा दी है। सीमा टॉकिज नई बस्ती के पास कचौड़ी विक्रेता मुकेश के प्रतिष्ठान के प्राथमिक सर्वे में सालाना बिक्री का अनुमान 60 लाख रुपये तक पहुंच गया है, जिससे अधिकारियों की आंखें फटी रह गई।
21 जून को शुरू हुई जांच अभी जारी है, जिसे एक सप्ताह में पूरा किया जाना है। इस कचौड़ी विक्रेता की शिकायत राजस्व अधिसूचना विभाग में हुई थी। जिसके बाद वाणिज्य कर विभाग की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम एसआईबी ने जांच शुरू की है।
एसआईबी के डिप्टी कमिश्रर रवेंद्र पाल सिंह कौंतेय ने बताया कि जांच से पहले इस कचौड़ी विक्रेता की सीमा टॉकिज के पास स्थित दुकान पर तीन चार दिन बिक्री का अनुमान लगाया गया था। इसके लिए विभागीय कर्मी वहां तैनात रहे। जब बिक्री का अनुमान जीएसटी की वर्तमान छूट से अधिक का निकला तो जांच शुरू हुई।
जांच में बिक्री और स्टाक में मिला माल ये साबित करने के लिए काफी था कि सलाना ब्रिकी 50 से 60 लाख रुपये के बीच है। कचौड़ी के साथ यहां पर समोसे भी बिकते हैं। पास की ही दो दुकानों में कच्चे माल का स्टॉक है।
इतनी ब्रिकी पर विक्रेता को जीएसटी में पंजीकृत होना चाहिए था और नियमानुसार पांच प्रतिशत जीएसटी भी देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा था। सीमा टॉकिज के पास लगभग 12-13 साल से कचौड़ी का कारोबार करने वाले मुकेश अकेले ऐसे विक्रेता नहीं है, जिनका टर्नओवर लाखों में है।
शहर में रेलवे रोड, जयगंज, सेंटर प्वाइंट, मीनाक्षी पुल, किशनपुर तिराहा, मैरिस रोड पर ऐसे कई कचौड़ी विक्रेता हैं, जिनका टर्नओवर लाखों में है।
अब विभागीय जांच इनकी ओर भी घूम सकती है, क्योंकि जीएसटी में राजस्व बढ़ाने के लिए उन दुकानदारों को भी दायरे में लाया जा रहा है, जो हकीकत में जीएसटी छूट के हकदार नहीं है। जिनका टर्नओवर लाखों रुपये में है और नामचीन शो रूम संचालित करने वाले भी इनसे कहीं पीछे हैं। अब विभागीय अधिकारी ऐसे दुकानदारों पर फोकस कर रहे हैं ताकि राजस्व लक्ष्य हासिल किया जा सके।