घातक जीका वायरस के संबंध में मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दिशा निर्देश जारी करने के बाद स्थानीय स्वास्थ्य विभाग भी चौकन्ना हो गया है। वह स्थिति और केंद्र व राज्य सरकार के इस संबंध में रुख पर पूरी नजर रखे हुए है।
हालांकि विभाग के अफसरों का कहना है कि इस संबंध में कोई औपचारिक निर्देश तो जारी नहीं हुए हैं लेकिन जन स्वास्थ्य के संबंध में होने वाली किसी भी गतिविधि को लेकर विभाग हमेशा चौकन्ना रहता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (एनसीडीसी) को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। सेंटर की दिल्ली और पुणे स्थित शाखाएं जीका वायरस की जांच करने वाली सर्वोच्च एजेंसियां होंगी।
क्या है जीका वायरस?
पहली बार युगांडा (अफ्रीका) के जीका के जंगलों में इसका वायरस पाए जाने पर इसका नाम जीका वायरस रखा गया। एडीज मच्छर के काटने के बाद जीका वायरस का संक्रमण फैलता है। यह वही मच्छर है जिसके काटने से डेंगू और चिकनगुनिया फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब तक 22 देशों और क्षेत्रों की सूची जारी की है
क्या हैं लक्षण?
इसमें हल्का बुखार, खुजली, आंखों में जलन, शरीर में दर्द, जोड़ों का दर्द। इसके अलावा वह लोग जो ग्रसित क्षेत्र में वायरस पाए जाने के दो सप्ताह के भीतर वहां यात्रा करते हैं। उनको संक्रमित होने की संभावना ज्यादा रहती है।
‘अभी यह हमारे लिए बिल्कुल नया है। कोई निर्देश तो केंद्र या राज्य के स्तर से हमारे पास नहीं हैं। लेकिन फिर भी आज कोई भी अंतरराष्ट्रीय घटना स्थानीय स्तर पर भी प्रभावित करती है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए हैं। लोगों से सावधानी की अपेक्षा की जाती है।’
- ऐके राय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी