भांकरी स्थित जेडी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में गभाना के एक व्यक्ति की मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि इस निजी मेडिकल कॉलेज के कुछ कर्मचारी मरीज को आयुष्मान योजना में इलाज के नाम पर एंबुलेंस से अस्पताल ले गए थे। गलत इलाज से उसकी मौत होने पर घर के बाहर सड़क पर शव फेंककर भाग गए। आक्रोशित ग्रामीणों ने शव रखकर गभाना थाने पर जबरदस्त प्रदर्शन किया। मृतक के चचेरे भाई ने अस्पताल संचालक व डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ ने मेडिकल पैनल गठित कर शव का पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए हैं। शासन से जांच पूरी होने तक मेडिकल कॉलेज का आयुष्मान योजना का अनुबंध स्थगित किए जाने की संस्तुति की है। पुलिस को दी तहरीर में पवन कुमार ने बताया कि उसका भाई देवी शरण (50) चाय बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था।
शुक्रवार को गांव में जेडी अस्पताल के कर्मचारी एंबुलेंस लेकर आए और आयुष्मान कार्ड धारकों का नि:शुल्क इलाज कराने के नाम पर देवीशरण व एक अन्य व्यक्ति को अपने साथ ले गए। देवी शरण ठीक हालात में एंबुलेंस में बैठकर गए थे। आरोप है कि रात्रि में अस्पताल कर्मी देवी शरण के शव को बिना बताए घर के सामने सड़क पर फेंक कर चले गए। उन्हें शव फेंकते गांव के कुछ लोगों ने देखा था।
घटना की जानकारी होने पर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। शनिवार सुबह सैकड़ों ग्रामीण शव लेकर थाने पर पहुंच गए और अस्पताल कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा करने लगे। सूचना पर बरौली विधायक ठाकुर दलवीर सिंह व एसडीएम प्रवीण यादव, सीओ कर्मवीर सिंह मौके पर पहुंच गए। विधायक दलवीर ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत कराया।
इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व अधिकारियों से फोन पर बात की। उन्होंने आयुष्मान कार्डधारकों के साथ हो रही धोखाधड़ी की जांच कराने के साथ ही अस्पताल को सील कराते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सूचना पर सीएमओ डॉ. बीपी कल्याणी व एसडीएम गभाना प्रवीण यादव अस्पताल में जांच करने के लिए पहुंच गए और वहां भर्ती मरीजों से बात कर जांच की।
जब अस्पताल आया तब ठीक था देवी शरण : सीएमओ
सीएमओ डॉ. बीपी कल्याणी ने बताया कि अब तक हुई जांच में पता चला है कि मृतक देवी शरण सांस की बीमारी का पुराना मरीज था। अस्पताल में मिले रिकॉर्ड में उसके खून में भी संक्रमण मिला था। हालांकि, जब उसे अस्पताल लाया गया, तब वह ठीक था। अस्पताल स्टाफ ने बताया कि इलाज के दौरान उसकी तबियत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ रेफर करने को परिजनों से संपर्क किया गया। लेकिन कोई नहीं आया। इसके बाद अस्पताल कर्मी उसे एंबुलेंस में घर लेकर गए और वहीं छोड़कर आ गए। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि उसकी मौत अस्पताल में ही हो गई थी या फिर घर छोड़ने के बाद।
मेडिकल पैनल की मौजूदगी में होगा शव का पोस्टमार्टम
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ डॉ. बीपी कल्याणी ने डॉ. एसपी सिंह के नेतृत्व में मेडिकल पैनल गठित कर दिया है। मृतक देवी शरण का पोस्टमार्टम इसी पैनल की निगरानी में होगा। मौत के असल कारण का पता लगाने की भी कोशिश होगी।
परिवार में मानसिक रूप से कमजोर पत्नी और बेटी
मृतक देवी शरण के परिवार में उसकी मानसिक रूप से कमजोर पत्नी मंजू व बेटी मेघा है। बेटी की शादी हो चुकी है और वह अपने पति के साथ गांव में ही रहती है। ग्रामीणों ने बताया कि देवी शरण बहुत गरीब था।