सुप्रसिद्ध साहित्यकार विष्णु नागर ने कहा कि विचाराधारा के आधार पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को बर्बाद करना उचित नहीं है। आप अयोध्या या किसी अन्य स्थान पर संघी या भाजपा विचारधारा के आधार पर समानांतरण विश्वविद्यालय खड़ा कर दीजिए।
साहित्यकार विष्णु नागर जनवादी लेखक संघ के कार्यक्रम के सिलसिले में एएमयू के एनआरएससी क्लब में आए थे। उन्होंने जेएनयू और बीएचयू में चल रहे विवाद पर ‘अमर उजाला’ से खुलकर बातचीत की। कहा कि जेेएनयू की अपनी एक छवि है।
केंद्र सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी यहीं से निकली हैं। मुख्यत: वामपंथी विश्वविद्यालय है। लोकतांत्रिक देश में भाजपा और कांग्रेस वैध है तो वामपंथी होना कैसे अवैध है? वहां पर सीपीआई-मार्क्सवाद की क्लास नहीं लग रही।
छात्रों का वामपंथ की ओर झुकाव है। वह स्वेच्छा से चुनते हैं। इससे सरकार को फर्क पड़ रहा है। वहां पर ऐसा वीसी नियुक्त कर दिया गया है जो हर दिन नया आदेश निकालता है, जिससे छात्र आंदोलन के लिए बाध्य होते हैं।
उन्होंने कहा कि अध्ययन क्षेत्र में कोई भी चीज ‘उठाओ और चुनो’ (पिक एंड चूज) नहीं होती। अध्ययन एवं शोध कर सिद्ध करना पड़ता है कि जो बात कर रहे हैं, वह प्रमाणिक है। बीएचयू में मुस्लिम शिक्षक डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति के विरोध पर उनका कहना है कि किसी भी भाषा पर धर्म या लिंग का हक नहीं हो सकता। सबसे महत्वपूर्ण ज्ञान और योग्यता है। धर्म के आधार पर नियुक्ति को रद्द नहीं किया जा सकता है।