दशहरा के मेले जारी हैं, इसके बाद करवाचौथ और फिर देश के सबसे बड़े त्योहार दीपावली का पंचोत्सव शुरू हो जाएगा। निम्म मध्यमवर्गीय बेरोजगार इन्हीं त्योहारों में ढकेल पर छोटे आइटमों की दुकानें सजा कर कुछ कमा लेते हैं, लेकिन महंगाई बढ़ने के कारण अब छोटे से छोटे से काम भी 5 से 10 हजार रुपये के बीच शुरू हो पाते हैं।
इसीलिए छोटे कामगार सूद पर रकम उधार लेते हैं और सूदखोरों के चंगुल में फंस जाते हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति है सूदखोरों के चंगुल में फंसे लघु व्यापारियों और ठेली ढकेल वालों की। जो एक बार ब्याज पर रकम लेने के बाद सूदखोरों के दल-दल में फंसते चले जाते हैं। ये लोग मूल रकम से पांच गुना रकम तक अदा कर चुके होते हैं, लेकिन इसके बाद भी मूल रकम के लिए कर्जदार बने रहते हैं।
एक हफ्ते में एसएसपी कार्यालय पर औसतन 10 ऐसे मामले आते हैं जिसमें सूदखोरों की शिकायत की गई होती है। इस मुसीबत का हल निकाल रहे हैं बैंकिंग साक्षरता मिशन का नेतृत्व कर रहे बैंकिंग विशेषज्ञ हरिश्चंद्र पांडेय कहते हैं कि छोटे व्यापारी और जरूरत मंद लोगों को शहर में सूदखोरों के चंगुल में आने की जरूरत नहीं है। उनके लिए रुपये कार्ड से और मुद्रा बैंक से बेहद कम ब्याज पर पैसा उपलब्ध कराने की सुविधा है। शहर में सूदखोरों के चुंगल में फंस कर कई लघु व्यापारी आत्महत्या और पलायन तक के लिए मजबूर हो चुके हैं।