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अलीगढ़ः तीन रूटों पर ई-बसों की सेवा शुरू होने में लगेगा एक महीना

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सोमवार से शहर के दो रूटों (खेरेश्वर-बौनेर और हरदुआगंज-मेहरावल) पर पांच इलेक्ट्रिक बसों (ई-बस) का संचालन शुरू हो गया है। अब शहर के अन्य तीन रूट ई-बसों के संचालन का इंतजार कर रहे हैं। मडराक से मेडिकल कॉलेज, शिवदान सिंह कॉलेज से हरदुआगंज और महेशपुर से छर्रा रूटों पर लोग इन बसों का इंतजार कर रहे हैं। यह इंतजार एक-दो दिन नहीं, बल्कि एक महीने के लिए करना पड़ेगा। क्योंकि सारसौल चार्जिंग बस स्टेशन में अभी चार्जिंग केबल डालने और दीवार बनाने का कार्य चल रहा है। यह कार्य पूरा होने के बाद ही अन्य रूटों पर बस चल सकती हैं। मडराक से मेडिकल कॉलेज जाने वाली बस सबसे ज्यादा सवारियों को ढोने वाली बन सकती हैं। क्योंकि इस रूट पर यात्रियों की संख्या हजारों में है, जबकि जिन दो रूटों पर ई-बस चल रही हैं, वह खाली चल रही हैं। यात्रियों में जानकारी का अभाव और प्रचार-प्रसार न होने के चलते बसों के अंदर यात्री सफर नहीं कर रहे हैं।
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बता दें कि वर्तमान में खेरेश्वर चौराहे से लेकर बौनेर और हरदुआगंज से मेहरावल तक पांच ई-बसों का संचालन हो रहा है। इन रूटों पर बीच-बीच में चढ़ने-उतरने के लिए प्वाइंट बनाए गए हैं। बसों का दरवाजा प्वाइंट पर ही खुलता है। जबकि बस चलने से पहले बंद हो जाता है। इसीलिए कई यात्री इसमें चढ़ने से दूरी बनाकर रखते हैं। क्योंकि बस जहां खड़ी होती है, वहां तक पहुंचने में लोगों का थोड़ा वक्त लगेगा। वहीं बस खड़ी रहती है तो लोग समझते नहीं हैं कि यह सिटी बस सेवा है। लोग हाईटेक बसों को देखते हैं तो लगता है कि या तो बाहर जाने वाली बस है। या फिर इनका किराया बहुत अधिक होगा, लेकिन हकीकत में ई-बसों का किराया शहर के किराए से सामान्य है। यही कारण है कि लोग अभी ई-बसों में चढ़ नहीं रहे हैं और बस एक-दो सवारी लेकर खाली चल रही हैं। हालांकि हालात हफ्तेभर में सामान्य होने के आसार लग रहे हैं।
जबकि मडराक-मेडिकल कॉलेज रूट पर अगर ई-बस सेवा शुरू होती है तो इससे सैकड़ों यात्री लाभान्वित होंगे। क्योंकि इस रूट पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग आते-जाते हैं। रसलगंज चौराहे से बाकायदा मेडिकल के लिए अलग से ई-रिक्शा चलते हैं। जिनमें बैठकर सैकड़ों यात्री मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं। अगर ई-बस शुरू हुई तो काफी सवारियां इस रूट पर चलेंगी, जबकि शिवदान सिंह कॉलेज-हरदुआगंज और महेशपुर तिराहे से छर्रा अड्डा तक भी ई-बसों का संचालन शुरू होना है। बाकी तीन रूटों पर बस चलने में एक महीना लग जाएगा। क्योंकि सारसौल चार्जिंग बस स्टेशन में अभी निर्माण कार्य और केबल डालने का कार्य चल रहा है। दीवार खड़ी होगी, चार्जिंग केबल डाली जाएंगी। इसके बाद छत तैयार होगी। जब चार्जिंग प्वाइंट पर बस खड़ी होकर चार्ज हो सकेंगी। तभी शहर के रूटों पर दौड़ पाएंगी। अभी अस्थायी चार्जिंग प्वाइंट की बदौलत दो रूटों पर पांच ई-बस चल रही हैं।
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25 ड्राइवर हो चुके हैं ट्रेंड
-अलीगढ़ में भर्ती हुए तकरीबन 36 ड्राइवरों में से 35 ड्राइवर ट्रेंड हो चुके हैं। कानपुर से आए छह-सात ड्राइवर नए ड्राइवरों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। कानपुर से आए ड्राइवर अपनी मौजूदगी में बसों को चलवाते हैं। जब रूट पर नया ड्राइवर ठीक तरीके से बस चलाने लगता है तो उसे हरी झंडी दे दी जाती है।
नहीं मिलेगी पास जैसी सुविधा
-28 सीटर ई-बसों के संचालन के बाद कुछ पास सेवा जारी करने की मांग उठने लगी थी। जिस पर अधिकारियों ने साफ कह दिया है कि किसी भी सूरत में पास जैसी सेवा नहीं चलेगी। जिसको चढ़ना है, वह किराया दो। 26 सीट सामान्य यात्रियों के लिए है तो दो सीट दिव्यांगों के लिए हैं। अगर सेवा का लाभ लेना है तो टिकट लेना पड़ेगा।
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