एक वर्ष पहले जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी थी तो लोगों को शहर में बुनियादी सुविधाओं में सुधार को लेकर उम्मीद जगी। स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी मरीजों का दर्द कम होने की आस जगी, लेकिन पिछले दो दिनों में अमर उजाला ने जन सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाएं, जीवन स्तर में सुगमता की दृष्टि से हालात का जायजा लिया तो तस्वीर उत्साहित करने वाली तो नहीं थी।
बुनियादी सुविधाएं - कौन सुनेगा, किसको सुनाएं
इस मोर्चे पर शहर के लोगों को अपने आसपास सफाई, साफ नालियां, अतिक्रमण मुक्त सड़कें जिससे वह अपने गंतव्य तक सुगमता से पहुंच सकें और सही हालत की गलियां सड़कें, पब्लिक टायलेट्स, शहर की फिजा को खूबसूरत करके पेड़ पौधे। यही सब चाहिए होता है एक नागरिक को अपने शहर में, लेकिन हम यहां पर बात करेंगे उन बिंदुओं की जो एक वर्ष पहले जैसे थे अब भी वैसे हैं।
1- कूड़ा निस्तारण- एटूजेड कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल जग जाहिर हैं और इसकी गूंज शासन तक पहुंच चुकी है। हकीकत यह है कि स्मार्ट सिटी की ओर कदम बढ़ा रहा शहर अभी भी ठोस कूड़ा निस्तारण प्रणाली के इंतजार में है।
2- अतिक्रमण- सड़कों पर बढ़ रहा यातायात और दिन प्रतिदिन सिकुड़ती सड़कें रोजाना के जनजीवन में आम आदमी की राह को मुश्किल कर रही हैं। अभियान चलाना सिर्फ चूहे बिल्ली का खेल बन गया है।
3- ड्रेनेज- शहर के ड्रेनेज व्यवस्था की हकीकत बरसात के दिनों में तो सामने आ ही जाती है। साथ ही बिना बरसात के भी नाले कीचड़ और गंदगी से अटे रहते हैं। इन पर हो रहे कब्जे स्थिति को और गंभीर बना देते हैं।
स्वास्थ्य सेवाएं- मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की...
बढ़ते मरीज और अस्पतालों में कम होते डाक्टर, दवाओं की किल्लत और डायग्नोसिस उपकरणों की कमी। इस हालत में सरकारी अस्पताल सिर्फ एक डिस्पेंसरी और रेफरल सेंटर बन कर रह गए हैं। यहां पर गंभीर बुखार का इलाज भी ठीक से नहीं मिल सकता है।
1- घटता स्टाफ- 215 बेड की क्षमता वाले मलखान सिंह जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1600 से 1800 मरीज ओपीडी में आते हैं, जबकि यहां पर सिर्फ 15 डॉक्टर तैनात हैं। स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वाय की भी कमी है। ऐसे में मरीजों को चिकित्सा सेवा उपलब्ध करना बेहद कठिन होता जा रहा है।
2- एडवांस उपकरण नहीं- आपात स्थिति में सांसों को थाम कर रखने वाला वेंटीलेटर किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं है। जबकि ढांचागत दृष्टिकोण से सरकारी अस्पतालों के पास ज्यादा संभावनाएं हैं।
3- नहीं शुरू हुआ सुपर स्पेशियलिटी- मोहन लाल गौतम जिला महिला अस्पताल में बनकर तैयार हुआ पांच मंजिला 100 बेड की मदर्स एंड चाइल्ड केयर सुपर स्पेशियलिटी यूनिट शुरू नहीं हुई है।
एक वर्ष पूरा होने पर छह सड़कों का लोकार्पण होगा
अलीगढ़। 11 मार्च को ही 1 वर्ष पहले चुनाव परिणाम घोषित हुए थे। चुनाव परिणाम के ठीक 1 वर्ष बाद शहर विधायक संजीव राजा अपनी निधि से बनी 6 सड़कों का लोकार्पण रविवार को कर देंगे। यह सड़कें हैं।
1- भुजपुरा में ठाकुर वाली गली में सीसी रोड निर्माण कार्य का लोकार्पण सुबह 11 बजे होगा।
2- दुर्गा नगर बीबी गर्ल्स स्कूल के पास सोरन सिंह के मकान से श्यामबाबू फौजी के मकान तक सीसी रोड निर्माण कार्य का लोकार्पण दोपहर 12 बजे होगा।
3- नगला मसानी हजीरा में बालाजी मंदिर वाली गली में मोरमुकुट के मकान से कमलेश के मकान तक सीसी रोड निर्माण कार्य का लोकार्पण दोपहर 12:30 बजे होगा।
4- बन्नादेवी थाने के पीछे फायर ब्रिगेड के पास संजय अग्रवाल के फैक्ट्री की बगल से जगदीश के घर तालाब तक सीसी निर्माण कार्य का लोकार्पण दोपहर 1 बजे होगा।
5- बन्नादेवी थाने के पीछे फायर ब्रिगेड के पास रामप्रकाश के मकान की बगल से विजयपाल के घर आबादी तक सीसी निर्माण कार्य का लोकार्पण दोपहर 1:30 बजे होगा।
6- रेलवे रोड इंदिरा मार्केट की बगल से कोर्ट ऑफ वाडर्स में ठाकुर हवेली तक सीसी रोड कार्य का लोकार्पण दोपहर 2 बजे होगा।