डॉ. आमिर ने बताया कि यह दुर्लभ सर्जरी थी। जाकिर की अच्छी किस्मत थी कि सरिया दिल और फेफड़े से दो इंच पहले ही मांसपेशियों में फंस गई, वरना स्थिति काफी खतरनाक हो सकती थी। सरिये ने खून की नसों को नुकसान नहीं पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि चूंकि भवन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सरिया में जंग लगा होता है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। हालांकि, दो सप्ताह में मरीज का घाव भरना शुरू हो जाएगा।
डॉ. आमिर ने कहा कि अगर छह घंटे बाद मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचता था, तो उसके जीवन पर खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। सीओ धनंजय सिंह ने बताया कि ओजोन सिटी परिसर में एक भवन स्वामी निर्माण कार्य करा रहा है। उसी दौरान हादसा हुआ है। मजदूर की हालत स्थिर बनी हुई है।