विद्यालय में उपजे इस माहौल की खबर शीर्ष प्रबंधन तक पहुंची तो उन्होंने मामले की जांच के लिए पूर्व प्रधानाचार्या सिस्टर ज्योत्सना को यहां जांच के लिए भेजा था। सिस्टर ज्योत्सना ने यहां कई दिन तक रहकर विद्यालय शिक्षक स्टाफ व छात्र-छात्राओं से अलग अलग संवाद किया। उन्होंने छात्र छात्राओं से संवाद में शिकायतें व समस्याएं पूछीं तो किसी ने खुलकर नहीं बताया।
बाद में उन्होंने छात्र-छात्राओं के समक्ष प्रस्ताव रखा कि वे बिना नाम पहचान खोले अपनी शिकायतें व सुझाव लिखित में दे सकते हैं। इस पर 350 से अधिक बच्चों ने शिकायत व सुझाव दिए थे। दसवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं के बच्चों के बीच संवाद के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद वे कई दिन तक यहां माहौल सामान्य करने के लिए रुकीं। बाद में उन्होंने अपनी रिपोर्ट शीर्ष प्रबंधन को सौंप दी है। अब चूंकि विद्यालय बंद हैं। इसलिए स्कूल खुलने पर किसी तरह की जानकारी सामने आ सकती है। वहीं विद्यालय में प्रत्येक कक्षा में एक अतिरिक्त शिक्षक की तैनाती व एक उच्च स्तर से काउंसलर की तैनाती तय हो गई है।
मुझे शीर्ष प्रबंधन ने जांच करने व माहौल समझने के लिए भेजा था। मैंने रिपोर्ट तैयार कर दी है। जिसमें बच्चों द्वारा दिए गए सुझाव व शिकायतें भी शामिल हैं। रिपोर्ट मैंने शीर्ष प्रबंधन को सौंप दी है। उसमें अपनी राय भी रखी है। मगर वह गोपनीय है। रहा सवाल रिपोर्ट पर निर्णय का तो वह शीर्ष प्रबंधन द्वारा लिया जाएगा। वहीं से कुछ अवगत कराया जा सकेगा।-सिस्टर ज्योत्सना, पूर्व प्रधानाचार्या ओएलएफ