धरनारत लोगों ने नेताओं की सहयोग अपील ठुकराई
शाहजमाल में जारी धरना प्रदर्शन के शाहीन बाग की शक्ल में तब्दील होने के बाद राजनीतिक पार्टियां भी यहां अपनी रोटियां सेंकने की फि राक में जुटी हैं। धरने के आयोजकों से संपर्क साधा जा रहा है। पुलिस-प्रशासन को इस बात की भनक लग गई है। इसके बाद प्रशासन ने गैरभाजपाई नेताओं पर निगरानी बढ़ा दी है। धरने को लीड कर रहीं एएमयू की छात्राएं खुद भी समर्थन नहीं ले रहीं हैं। उनका मानना है कि धरना में नेताओं की इंट्री होते ही यह राजनीतिक तौर पर हाईजैक हो जाएगा, जिसमें एएमयू का मुद्दा हो या सीएएए एनआरसी का विरोध। सब पीछे छूट जाएगा।
राजनीतिक पार्टियां इस प्रदर्शन को 60-70 के दशक में महिलाओं की ओर से राजनीतिक दखल के लिए किए गए प्रदर्शन की तर्ज पर देख रही हैं। शहर में सक्रिय करीब एक दर्जन नेताओं के बारे में पुलिस को जानकारी मिली है कि उन्होंने शाहजमाल के लोगों से बुधवार और बृहस्पतिवार को संपर्क किया। इन नेताओं ने बिना लीडर धरना असफ ल होने जैसी बातें कहीं हैं। इन नेताओं ने एएमयू की छात्राओं से भी संपर्क किया, मगर दोनों ही जगह से इंकार कर दिया गया। धरना स्थल पर मौजूद एएमयू छात्राओं सेे बात की गई तो उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
शासन को भेजी गई है रिपोर्ट : डीएम
डीएम चंद्रभूषण सिंह ने कहा है कि एएमयू में जारी गतिरोध और शाहजमाल में शुरू हुए धरना प्रदर्शन की रिपोर्ट शासन के भेजी गई है। शाहजमाल में बिना अनुमति धरना प्रदर्शन कराने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। उनके खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा और कार्रवाई होगी। शहर का माहौल खराब करने वालों के खिलाफ जिला बदर और गुंडा एक्ट की कार्रवाई भी हो रही है।
रुख से जरा नकाब हटाओ मेरे हुजूर..
शाहजमाल का धरना प्रदर्शन पुलिस प्रशासन के लिए दोहरा सिरदर्द बन गया है। पहला धरना प्रदर्शन का संख्या बल शुक्रवार रात अचानक बहुत बढ़ गया। दूसरा, बिना प्रशासनिक अनुमति के हो रहे इस प्रदर्शन में शामिल 250 से 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा है क्योंकि हिजाब ओढ़े महिलाओं और रुमाल व मफलर बांधे युवकों की पहचान कर नोटिस तामील कराना मुश्किल हो गया है। पुलिस के स्थानीय मुखबिर भी इसमें हाथ डालने से कतरा रहे हैं, उनको भी भीड़ से डर लग रहा है। ऐसे में इन अज्ञात लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।
धरना प्रदर्शन के लिए घरों से महिलाओं और बच्चों को लेकर आ रहे शिक्षित वर्ग ने उनको इस बात की ताकीद बहुत कायदे से की है कि हिजाब पहनकर धरना दो। किसी भी कीमत पर चेहरा मत खोलो। पुलिस को वीडियोग्राफ ी में जब चेहरा ही नहीं आएगा तो पहचान कैसे होगी..? इन महिलाओं को ये भी सिखाया गया है कि मीडिया के सामने भी अपने चेहरे मत खोलो जिससे पहचान हो सके। इस प्रदर्शन में भी दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर पुरुषों को पीछे रखा जा रहा है। वजह साफ है कि महिलाओं पर आसानी से बलपूर्वक कार्रवाई नहीं होगी।
खैर, पुुलिस खुुफि या तौर पर महिलाओं की पहचान कराने में जुटी है। एलआईयू रोजाना एक रिपोर्ट भी भेज रही है। सीओ प्रथम विशाल पांडेय के मुताबिक पुुलिस ने इस धरना प्रदर्शन के साजिशकर्ताओं को निशाने पर ले लिया गया है। उनको जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा। हिजाब, मफलर, रुमाल पहनने वालों की पहचान में परेशानी जरूर हो रही है, लेकिन पुलिस अपना काम कर रही है। जल्द ही इनकी पहचान उजागर होगी।