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50 लाख के लिए ‘मुर्दे’ का बीमा..फिर एक माह बाद मांगा क्लेम

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बात अटपटी और सुनने में हैरान करने वाली है। यहां एक बीमा कंपनी के दफ्तर में ‘मुर्दा’ अपने नाम से 50 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी करा गया। पॉलिसी कराने के एक माह बाद जब एकाएक उसकी मौत हो गई और परिवार ने मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाते हुए बीमा क्लेम मांगा तो कंपनी का माथा ठनक गया।
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गोपनीय जांच में भेद खुला तो कंपनी अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि जिस व्यक्ति का बीमा किया गया था, उसकी मौत तो पॉलिसी खरीदने से पूर्व ही हो चुकी है। इस पर बीमा कंपनी ने पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया और डीआईजी के निर्देश पर गांधीपार्क में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करा दी गई है।
ऑनलाइन कराई फर्जी बीमा पॉलिसी
आईसीआईसीआई प्रोटेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड का यहां गांधीपार्क सराय बैजनाथ में दफ्तर है। उनके यहां पॉलिसी बाजार डॉट काम के जरिये 8 मार्च 2018 को उपेंद्र सिंह पुत्र सुखवीर सिंह निवासी गांव कैमथल इगलास ने पॉलिसी आवेदन किया और उपेंद्र के नाम से 12 मार्च को पॉलिसी जारी की गई। इसके एवज में कुल 1583 रुपये प्रीमियम जमा किया गया। साथ ही 50 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी जारी करते हुए 531 रुपये प्रतिमाह की किश्त जमा करना तय किया गया।
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नर्सिंग होम ने जारी किया मृत्यु प्रमाण पत्र
इसके बाद उपेंद्र की पत्नी कल्पना देवी की ओर से 28 मई 2018 को उपेंद्र की मृत्यु का दावा करते हुए बीमा क्लेम आवेदन किया और आवेदन के समय 15 अप्रैल को कुत्ते काटने के संक्रमण से एक नर्सिंग होम से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र जमा किया। बीमा कंपनी अधिकारियों ने पॉलिसी खरीदने के कुछ समय में ही एकाएक आवेदन की मौत और क्लेम आवेदन को गंभीरता से भी लिया और उनका माथा भी ठनक गया। इसे लेकर इसकी गोपनीय जांच कराई गई।
नशे में छत से गिरकर हो चुकी है मौत
कंपनी की गोपनीय जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि जिस व्यक्ति के नाम से बीमा आवेदन 8 मार्च को किया गया था। उसकी मौत 28 फरवरी को ही शराब के नशे में छत से गिरने के कारण हो चुकी है। इसके लिए बाकायदा गांव की आशा वर्कर व आंगनबाड़ी वर्कर के रजिस्टर में मृत्यु दर्ज है। साथ ही बीमा आवेदन समय उसके असल मृत्यु प्रमाण पत्र संख्या 12518800699 को भी सरकारी वेबसाइट से निरस्त किया गया है। बीमा आवेदन के समय मेडिकल जांच के लिए किसी फर्जी व्यक्ति को यहां खड़ा किया गया था। फार्म पर भी फर्जी व्यक्ति के ही हस्ताक्षर साबित हुए। यह सब फर्जी तरीके से धन अर्जित करने के लिए किया गया।
लीगल सेल ने दी शिकायत, बड़े रैकेट का अंदेशा
मामले में बीमा कंपनी के लीगल सेल के अधिकारियों ने साक्ष्य व फर्जीवाड़े के दस्तावेजों सहित डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह से मुलाकात की। डीआईजी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल गांधीपार्क पुलिस को मुकदमे के निर्देश दिए। मामले में कंपनी के ब्रांच मैनेजर सिद्धार्थ ग्रोवर की तहरीर पर उपेंद्र की पत्नी कल्पना देवी के खिलाफ फर्जीवाड़े की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इंस्पेक्टर गांधीपार्क शंभूनाथ सिंह के अनुसार मामले में विवेचना शुरू कर दी है।
बयान
हो सकता है कि इसके पीछे कोई बड़ा रैकेट हो, इसे खोजकर निकालने के निर्देश दिए हैं। वह डॉक्टर भी जांच की जद में आएगा, जिसने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। हो न हो यह किसी बड़े रैकेट का खेल है, जो भी तथ्य सामने आएगा, उसके अनुसार कार्रवाई कराई जाएगी।
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- डॉ. प्रीतिंदर सिंह डीआईजी रेंज
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