पवन कुमार की मृत्यु से संबंधित दावे को बीमा कंपनी के निरस्त करने पर स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार व वरिष्ठ सदस्य शाजिया सिद्दीकी ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड लखनऊ व उसकी शाखा अलीगढ़ के क्षेत्रीय प्रबंधक के खिलाफ फैसला सुनाया है। कंपनी को मृतक आश्रित को 10 लाख रुपये देना होगा। देरी की सूरत में सात प्रतिशत ब्याज के साथ यह राशि देनी होगी।
निधौली, गोंडा निवासी राजवीर सिंह के अनुसार, उनके पुत्र पवन कुमार उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम में संविदा परिचालक के रूप में चालक थे। 25 फरवरी 2017 में दुर्घटना में आई चोट से उसकी मौत हो गई थी। पवन ने ग्रुप पसर्नल एक्सीडेंट पॉलिसी के तहत 10 लाख रुपये का बीमा कराया था।
जिसकी तिथि 27 अगस्त 2016 से 2017 तक थी। मृतक के पिता ने बीमा कंपनी में दावा प्रस्तुत किया। दुर्घटना के संबंध में थाना इगलास में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इंडिका कार व बुलेट के बीच आमने-सामने से टक्कर हुई थी।
दुर्घटना के समय पवन बाइक पर सवार होना प्रमाणित होता है। बीमा कंपनी शर्तों के अनुसार ही बीमा देने के लिए उत्तरदायी है, लेकिन पवन के प्रकरण में बीमा देने के लिए उत्तरदायित्व नहीं है। इसके बाद राजवीर ने स्थायी लोक अदालत की शरण ली। अदालत ने बीमा कंपनी को 10 लाख रुपये मृतक आश्रित को देने का आदेश दिया है।