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केंद्र व्यवस्थापक की जगह पुलिस ने प्रधानाचार्य को ही बना दिया वादी

Sat, 06 May 2017 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
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Demo Pic - फोटो : google
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मनोज माहेश्वरी
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नौरंगीलाल जीआईसी के प्रधानाचार्य सिस्टम के झोल में फंस गए हैं। एक मुकदमे में पुलिस ने उन्हें वादी बना दिया है। अब स्थिति यह है कि अभियुक्त पक्ष उन पर इस बात के  लिए      दबाव बना रहा है कि वह इस मुकदमे में या तो शपथपत्र दे दें या फिर उसके पक्ष में कुछ लिखकर दे दें। वहीं पुलिस विवेचना के रूप में वादी के रूप में उनकी भूमिका तय कर रही है। 
शुक्रवार को जब विवेचनाधिकारी ने कालेज में पहुंचकर उनसे नाम के साथ-साथ स्थायी पता पूछा तो उन्होंने स्पष्ट रूप से यह कह दिया कि जब उन्होंने पुलिस को तहरीर ही नहीं दी है तो उन्हें पुलिस ने मुकदमे में वादी क्यों बना दिया। इस दौरान उनकी विवेचक से नोकझोंक भी हुई। 
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हुआ यूं कि यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान एक सचल दल प्रभारी के रूप में नौरंगीलाल जीआईसी के प्रधानाचार्य शीलेंद्र कुमार ने धुर्रा प्रेमनगर के आरएस इंटर कालेज में छापा मारा। वहां उन्होंने दो फर्जी कक्ष निरीक्षक पकड़े। छापे के दौरान एक फर्जी कक्ष निरीक्षक ने उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया। मौके पर पुलिस अधिकारी भी आ गए। 
प्रधानाचार्य के मुताबिक परीक्षा केंद्र के केंद्र व्यवस्थापक को लिखित में यह निर्देश दिए कि वह इस मामले में उचित कार्रवाई करें। उन्होंने तो केंद्र व्यवस्थापक से उन शिक्षकों की तत्काल सेवा समाप्त करने को कहा था, लेकिन थाना पाली मुकीमपुर पुलिस ने इस मुकदमे में उन्हें ही वादी बना दिया है। ऐसे में यह मामला उनके  गले की फांस बनता जा रहा है। गुरुवार को कुछ लोग कालेज में इस मकसद से पहुंचे की प्रधानाचार्य अपने मुकदमे को वापस ले लें। यह लोग उन्हें नियम-कानूनों का हवाला देने लगे। इस पर उन्होंने इन लोगों से यह कहकर अपना पिंड  छुड़ाया कि उन्होंने तो पुलिस को कोई तहरीर ही नहीं दी थी। अब शुक्रवार को थाना पाली मुकीमपुर का एक दरोगा कालेज पहुंच गया। वह इस मुकदमे का विवेचक है। उन्होंने जब प्रधानाचार्य से घटना में उनके बयान दर्ज करने शुरू कर दिए तो प्रधानाचार्य ने उसे घटना तो बता दी, लेकिन जब उसने उनका स्थायी पता पूछा तो प्रधानाचार्य ने सवाल खड़ा कर दिया। 
उन्होंने दरोगा पर ही सवाल दागते हुए कहा कि जब उन्होंने पुलिस को तहरीर नहीं दी तो उन्हें वादी क्यों बनाया गया है। वह अपना स्थायी पता नहीं बताएंगे। उनकी दरोगा से नोक-झोंक भी हुई। इस पर दरोगा उन्हें यह चेतावनी देकर चला गया कि यदि वह अपना पता खुद नहीं बताएंगे तो वह लिखित में उन्हें पता बताने में मजबूर कर देगा। 
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इस मुकदमे में मुझे पुलिस ने गलत तरीके से वादी बना दिया है। मैंने तो केंद्र व्यवस्थापक को मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। अपने विभाग के उच्चाधिकारियों से इसकी शिकायत करूंगा।  
- शीलेंद्र कुमार, प्रधानाचार्य नौरंगीलाल जीआईसी 
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