अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी और जेएनयू में हुई हिंसा के विरोध में चल रहे धरना प्रदर्शन के संबंध में खुफिया एजेंसियों ने शासन को एक महत्वपूर्ण इनपुट भेजा है जिसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालय में हो रहे धरना प्रदर्शन का अब राष्ट्रीय मुद्दों से अलग विश्वविद्यालय के आंतरिक मुद्दों पर विरोध केंद्रित हो गया है।
विरोध प्रदर्शन में शामिल कुछ लोग विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ अपने हितों की पूर्ति करने के लिए सौदेबाजी की मुद्रा में आ गए हैं। इस संबंध में पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
गौरतलब है कि 9 दिसंबर 2019 से लेकर और अब तक विश्वविद्यालय में धरना, प्रदर्शन, रैली, प्रोटेस्ट मार्च आदि तरह-तरह के आंदोलन का क्रम जारी है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि कुछ छात्र नेता जो आज से पांच-छह पहले विश्वविद्यालय से निलंबित किए गए थे, अब इस बात की सौदेबाजी कर रहे हैं कि उन्हें बहाल किया जाए।
इसी तरह कुछ छात्र नेता अपने परिजनों के हितों की पूर्ति के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ सौदेबाजी में आ गए हैं। इस तरह की गतिविधियों की पूरी सूचना शासन को दी गई है।
विश्वविद्यालय की सुरक्षा के लिए लिखा था पत्र:वीसी
अलीगढ़ । एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि उन्होंने सुरक्षा संबंधी जो पत्र शासन को लिखा था वह स्वयं और उनके परिवार से संबंधित ना होकर विश्वविद्यालय और इसमें पढ़ने वाले हजारों छात्रों की सुरक्षा के संबंध में था । संचार माध्यमों में उस पत्र का गलत संदर्भ सामने आया।
उन्होंने कहा कि अगर कैंपस खुलने के बाद असामाजिक तत्वों के द्वारा कोई अवांछनीय गतिविधि को अंजाम दिया जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता। उस समय यह कहा जाता कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने हमें पहले से अवगत नहीं कराया। इसलिए यह पत्र एहतियातन सरकार और व्यवस्था को अवगत कराने के मकसद से लिखा गया था।
इस विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले सभी छात्र मेरे बच्चों की तरह है और उनसे मुझे किसी तरह का कोई खतरा नहीं है। इस विश्वविद्यालय को अगर खतरा है तो बाहरी और असामाजिक तत्वों से है । वही इस को नुकसान पहुंचाने की मंशा रखते हैं और ऐसे ही असामाजिक तत्व को बर्बाद करने का इरादा रखते हैं। हम ऐसे लोगों का मकसद कामयाब नहीं होने देंगे।