जम्मू कश्मीर के अखनूर में हुए दर्दनाक हादसे में पत्नी को खोने वाले घायल भगवान सिंह ने बताया कि अधिक सवारियां देख पहले चालक ने मना कर दिया था। इस पर बस मालिक ने दूसरा चालक भेजा था।
जम्मू कश्मीर के अखनूर में हुए बस हादसे में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस घटना में अपनी पत्नी को खोने और स्वयं घायल इगलास के नाया गांव निवासी भगवान सिंह के अनुसार अधिक सवारियां देखकर चालक ने बस ले जाने से मना कर दिया था। इसके बाद बस मालिक ने तत्काल इंतजाम कर दूसरे चालक को बस लेकर शिवखोड़ी के लिए भेजा था। इस चालक को रास्ता नहीं पता था।
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शनिवार की दोपहर ही भगवान सिंह को उनके पुत्र पंकज व नहना सहित एक अन्य चार पहिया वाहन से गांव लेकर लौटे हैं। उन्हें अभी नहीं बताया गया है कि बस में साथ मौजूद उनकी पत्नी की हादसे में जान जा चुकी है।
भगवान सिंह ने बताया कि हाथरस से निकलने के बाद अगले दिन कुरुक्षेत्र में रात्रि विश्राम किया था। अगले दिन 29 मई को शिवखोड़ी जा रहे थे। बस के चालक को रास्ते के मोड़ आदि की जानकारी नहीं थी। जिस समय हादसा हुआ अचानक से बस के सामने एक चार पहिया वाहन आ गया था।
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सामने ही गहरी खाईं थी। इस पर उसके हाथ से स्टेयरिंग अनियंत्रित हो गई और बस खाईं की तरफ सड़क किनारे एक पेड़ से टकराई। पेड़ से टकराते ही बस चालक सहित अपने भांजे को लेकर तीर्थयात्री ललित पुत्र सरबजीत सिंह, मई गांव निवासी राकेश बस से बाहर कूद गए थे।
बस की टक्कर लगने के क्षण भर में ही पेड़ टूटकर गिर गया और बस पलटते हुए गहरी खाईं में जा गिरी। उस समय दहशत में आंखें बंद हो गईं। कुछ भी होश न रहा। शुरुआती बचाव कार्य के दौरान जो लोग होश में थे, उन्हें रस्सा फेंककर ऊपर खींचा गया। इसके बाद अन्य तरीकों से घायलों, मृतकों को निकाला गया।
शव आने तक गांव के बाहर ही रहीं रिश्तेदार महिलाएं
हादसे में मृत लोगों के परिवार की महिलाओं को शनिवार की शाम छह बजे तक अपनों की मौत की जानकारी नहीं दी गई थी। शनिवार को गांव में शव आने थे, इसलिए रिश्तेदार महिलाएं भी शोक जताने के लिए दोपहर में ही नाया गांव पहुंच गई थीं। हादसे में मृत सुरेश सिंह और उनके नाती तनुज के लिए शोक जताने पहुंची रिश्तेदार महिलाओं को गांव के बाहर ही उनके वाहन में परिवार और गांव के पुरुषों ने रोक दिया था ताकि घर की महिलाओं को मौत होने की खबर न लगे। यह महिलाएं कई घंटे तक उसी वाहन में बैठे शवों के गांव आने का इंतजार करती रहीं।
दोपहर में ही तैयार हो गईं थीं अर्थियां
ग्रामीण घेघराज सिंह के अनुसार सभी मृतकों के परिजन सहित, गांव वालों व रिश्तेदारों ने दोपहर में ही अर्थियां तैयार कर ली थीं। गंगाजल भी एकत्र कर लिया था। नाया गांव के बाहर ही एकांत में मौजूद बगीची को सभी शव उतारने के लिए प्रशासन ने चिह्नित किया था। शव आने पर वहीं पर सभी के परिवार की महिलाओं को ले जाया गया।
वहीं पर सभी शवों पर गंगाजल का छिड़काव करने की व्यवस्था कर ली गई है ताकि अंतिम संस्कार के लिए कोई दिक्कत न हो। उन्होंने बताया कि शासन से मृतकों के आश्रितों के लिए नौकरी की मांग करने वाले युवाओं को समझा दिया गया है। यह हादसा और दुख की घड़ी है। किसी प्रकार की कोई मांग इस समय अनुचित है।
लकड़ी-कंडे के लिए परिवार वालों ने मना किया
प्रशासन की ओर से एसडीएम इगलास महिमा सिंह राजपूत, एसडीएम खैर दिग्विजय सिंह, सीओ खैर राजीव द्विवेदी, तहसीलदार उदयवीर सिंह, तहसीलदार अतरौली, नायब तहसीलदार, अमीन, लेखपाल, पंचायत विभाग और ब्लॉक के कर्मचारी गांव में मौजूद थे।
उन्होंने अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी-कंडे आदि की व्यवस्था के संबंध में मृतकों के परिवार से पूछा लेकिन उन्होंने मना कर दिया। लकड़ी-कंडे की व्यवस्था परिवार वालों ने स्वयं कर ली थी। वहीं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मृतकों के घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों का ब्लड प्रेशर आदि चेक करते रहे।
दामाद का कैंसर सही हो गया, लेकिन पत्नी की मनौती पूरी न हो सकी
हादसे में अपनी पत्नी सुनीता को खो चुके रवेंद्र सिंह ने बताया कि उनके दामाद सुभाष पुत्र लाल सिंह निवासी रामपुर उमरी जिला मथुरा को दो साल पहले कैंसर हुआ था। उस समय पत्नी सुनीता देवी ने मनौती मानी थी कि उनके दामाद का कैंसर सही हो गया तो वह शिवखोड़ी में मइया के दर्शन करेंगी।
दामाद का कैंसर सही हो गया। इस पर उनकी पत्नी दामाद और धेवते राज कुंतल को साथ लेकर शिवखोड़ी गई थी। जिंदगी भर की पीड़ा यही रहेगी कि अपनी मनौती के रूप में उनकी पत्नी मइया के दर्शन नहीं कर पाई। पहले ही हादसे ने जान ले ली।