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चिंता...शाहीन बाग बनने की कगार पर अलीगढ़ का शाहजमाल

Thu, 30 Jan 2020 02:08 AM IST
राजेश सिंह अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
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शाह जमाल में देर रात... - फोटो : अमर उजाला
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नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन की तर्ज पर शाहजमाल में प्रदर्शन शुरू हो गया है। बुधवार दोपहर 2 बजे शुरू हुआ धरना प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। महिलाओं ने कंबल और बिस्तरों का इंतजाम किया और वहीं डट गईं। 

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अंदरखाने कुछ ठेकेदारों ने इस इंतजाम में पूरी मदद की। रात पौने नौ बजे के करीब यहां शहर मुफ्ती खालिद हमीद भी पहुंचे। उन्होंने सभी से शांतिपूर्ण धरना करने की गुजारिश की। समझाया भी कि रात का धरना प्रदर्शन न करें। सड़क न जाम करें। ऐसा कुछ न करें जिससे किसी को कोई परेशानी हो। 

शहर मुफ्ती के समझाने का असर कुछ देर दिखा भी, कुछ लोग वहां से अपने घरों को जाने लगे, लेकिन उनके वापस लौटते ही एक बार फिर से कंबल और बिस्तर लेकर लोगों को आना शुरू हो गया। इसके बाद सभी ईदगाह के सामने सड़क पर ही डट गए। खुले आसमान के नीचे कड़ाके की ठंड में धरना प्रदर्शन शुरू हो गया और हमें चाहिए आजादी, लेके रहेंगे आजादी के नारे गूंजने लगे। 
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रात 11 बजे के करीब पुलिस ने भी बैरीकेडिंग लगा कर धरना स्थल को चारों ओर से कवर किया। डीआईजी/ एसएसपी आकाश कुलहरि, एसपी सिटी अभिषेक, एसपी ट्रैफिक अजीजुल हक और इंस्पेक्टर कोतवाली वीरेंद्र कुमार ने भी लोगों को समझाया लेकिन बात नहीं बनी। देर रात खबर लिखने तक धरना प्रदर्शन जारी था।  

बीती  21 और 22 जनवरी को यहां प्रदर्शनकारियों ने अनुमति लेकर धरना प्रदर्शन किया था और दोनों दिन शाम को समाप्त कर दिया था। इसके बाद प्रशासन का इस ओर से ध्यान हट गया था। बुधवार को सधी हुई रणनीति के तहत अचानक हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने यहां दोबारा से धरना शुरू कर दिया। इससे साफ  लगता है कि वह लोग एएमयू धरना प्रदर्शन और नुमाइश के आयोजन में व्यस्त जिला प्रशासन की सिरदर्दी बढ़ा रहे हैं। 

जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी इस धरना प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के प्रयास में जुट गए हैं। शाहजमाल ईदगाह के प्रबुद्धजन, ईदगाह कमेटी, शहर मुफ्ती से इस संबंध में वार्ता की जा रही है। जिससे इसको जल्द से जल्द सम्पन्न कराया जा सके। प्रशासन को शंका है कि प्रदर्शनकारी शाहजमाल को कहीं शाहीन बाग न बना दें। बुधवार को भारत बंद के आह्वान के चलते भी तमाम बैठकों को आयोजन पुलिस और प्रशासन की ओर से किया गया। मगर, इन सबका नतीजा शून्य निकला। प्रदर्शनकारियों ने हजारों की भीड़ जुटा कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। 

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बिना अनुमति प्रदर्शन, खुफिया तंत्र फेल

शाहजमाल ईदगाह में हुए प्रदर्शन ने एक बार फि र खुफि या तंत्र की पोल खोल दी। इस धरने में तीन से चार हजार की भीड़ शामिल रही। सर्वाधिक संख्या महिलाओं और बच्चों की रही। पुरुष उनके पीछे रहे। पूरा प्रदर्शन पहले से प्लान किया गया था। मगर, खुफि या तंत्र को इस बात की भनक भी न लगी और वह एक बार फि र फेल साबित रहा। इस बार प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से अनुमति तक नहीं ली और अचानक से धरने पर बैठ गए। इससे पुलिस और प्रशासन के अचानक हाथ पांव फू ल गए।

उच्च शिक्षित वर्ग रहा सक्रिय 
शाहजमाल में हुए धरना प्रदर्शन में एक बार फिर से यह बात सामने आई कि प्रदर्शनकारियों के बीच शिक्षित वर्ग सक्र्तिय रहा। महिलाओं के हाथों में इसी वर्ग ने अंग्रेजी में लिखी तख्तियां थमाई। एक लय और युवाओं जैसे नारे लगाती इन महिलाओं के बीच रहकर यह इस वर्ग ने उनको प्रशिक्षित भी किया। जैसे ही कुछ महिलाएं अपने घरों को जाने को हुईं। इस वर्ग ने शिक्षित महिलाओं को तमाम दुहाई देकर रोकना शुरू कर दिया।

महिलाओं, बच्चों को फि र बनाया ढाल
विरोध प्रदर्शन का रोडमैप तैयार करने वालों ने बेहद ही सधे हुए तौर तरीके से इस बार भी पुलिस प्रशासन को बैकफु ट पर करने के लिए बच्चों और महिलाओं को ही आगे रखा। उनको पता है कि महिलाओं और बच्चों पर पुलिस जल्द ही बलपूर्वक  कार्रवाई नहीं करेगी। हालांकि पुलिस ने पूरे घटना क्र्तम की वीडियो बना ली है। पुलिस इस प्रदर्शन को हवा देने वालों को चिन्हित करने का भी दावा कर रही है। पुलिस के मुताबिक बच्चों को ढाल बनाने वालों पर पूर्व की तरह ही मुकदमे दर्ज होंगे। 

बच्चे और किशोर भी धरने में डटे रहे 
शाम रात नौ बजते बजते महिलाएं, बच्चे पुरुष यहां कंबल, रजाई और अन्य बिस्तर लेकर पहुंचने लगे थे। इरादा साफ था कि अब रात यहीं सड़क पर गुजरनी है। रात 12 बजे तक सभी कड़ाके की ठंड में भी यहां डटे रहे। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी को भरसक समझाने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं बनी। छोटे बच्चों को घर पर ही रोका गया लेकिन किशोर और युवा अपने परिवार की महिलाओं और बुजुर्गों के साथ डटे रहे। किसी ने टस से मस नहीं किया।
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