शाहजमाल ईदगाह में हुए प्रदर्शन ने एक बार फि र खुफि या तंत्र की पोल खोल दी। इस धरने में तीन से चार हजार की भीड़ शामिल रही। सर्वाधिक संख्या महिलाओं और बच्चों की रही। पुरुष उनके पीछे रहे। पूरा प्रदर्शन पहले से प्लान किया गया था। मगर, खुफि या तंत्र को इस बात की भनक भी न लगी और वह एक बार फि र फेल साबित रहा। इस बार प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से अनुमति तक नहीं ली और अचानक से धरने पर बैठ गए। इससे पुलिस और प्रशासन के अचानक हाथ पांव फू ल गए।
उच्च शिक्षित वर्ग रहा सक्रिय
शाहजमाल में हुए धरना प्रदर्शन में एक बार फिर से यह बात सामने आई कि प्रदर्शनकारियों के बीच शिक्षित वर्ग सक्र्तिय रहा। महिलाओं के हाथों में इसी वर्ग ने अंग्रेजी में लिखी तख्तियां थमाई। एक लय और युवाओं जैसे नारे लगाती इन महिलाओं के बीच रहकर यह इस वर्ग ने उनको प्रशिक्षित भी किया। जैसे ही कुछ महिलाएं अपने घरों को जाने को हुईं। इस वर्ग ने शिक्षित महिलाओं को तमाम दुहाई देकर रोकना शुरू कर दिया।
महिलाओं, बच्चों को फि र बनाया ढाल
विरोध प्रदर्शन का रोडमैप तैयार करने वालों ने बेहद ही सधे हुए तौर तरीके से इस बार भी पुलिस प्रशासन को बैकफु ट पर करने के लिए बच्चों और महिलाओं को ही आगे रखा। उनको पता है कि महिलाओं और बच्चों पर पुलिस जल्द ही बलपूर्वक कार्रवाई नहीं करेगी। हालांकि पुलिस ने पूरे घटना क्र्तम की वीडियो बना ली है। पुलिस इस प्रदर्शन को हवा देने वालों को चिन्हित करने का भी दावा कर रही है। पुलिस के मुताबिक बच्चों को ढाल बनाने वालों पर पूर्व की तरह ही मुकदमे दर्ज होंगे।
बच्चे और किशोर भी धरने में डटे रहे
शाम रात नौ बजते बजते महिलाएं, बच्चे पुरुष यहां कंबल, रजाई और अन्य बिस्तर लेकर पहुंचने लगे थे। इरादा साफ था कि अब रात यहीं सड़क पर गुजरनी है। रात 12 बजे तक सभी कड़ाके की ठंड में भी यहां डटे रहे। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी को भरसक समझाने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं बनी। छोटे बच्चों को घर पर ही रोका गया लेकिन किशोर और युवा अपने परिवार की महिलाओं और बुजुर्गों के साथ डटे रहे। किसी ने टस से मस नहीं किया।